देहरादून- सरकार ने इस बार केवल राज्य स्तर पर ही नहीं, बल्कि अन्य राज्यों के साथ मिलकर भी रणनीति बनाई है। राजस्थान सहित कई राज्यों के साथ समन्वय स्थापित कर स्वास्थ्य दिशानिर्देश साझा किए जा रहे हैं। अधिकारियों के मुताबिक, जहां से बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं, वहां पहले से ही जागरूकता अभियान चलाकर यात्रा को सुरक्षित बनाना इस योजना का मुख्य उद्देश्य है।
राजस्थान में विशेष अभियान, अधिकारियों की बैठक
स्वास्थ्य विभाग के सहायक निदेशक डॉ. अमित शुक्ला ने राजस्थान का दौरा कर वहां के प्रशासनिक और स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ विस्तृत बैठक की। इस बैठक में तय किया गया कि चारधाम यात्रा से जुड़े सभी जरूरी स्वास्थ्य सुझाव और गाइडलाइंस को अधिकतम लोगों तक पहुंचाया जाएगा।
विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया गया कि यात्रा पर जाने से पहले ही श्रद्धालुओं को उनकी शारीरिक स्थिति, जरूरी सावधानियों और जोखिमों के बारे में स्पष्ट जानकारी दी जाए।
गांव-गांव तक पहुंचेगी हेल्थ एडवाइजरी
इस बार की सबसे बड़ी खासियत यह है कि स्वास्थ्य एडवाइजरी को सिर्फ शहरों तक सीमित नहीं रखा जाएगा। इसे गांव स्तर तक पहुंचाने की योजना बनाई गई है। इसके लिए स्थानीय प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और जनप्रतिनिधियों की मदद ली जाएगी।
इस कदम से ग्रामीण क्षेत्रों के श्रद्धालु भी यात्रा से पहले पूरी तरह जागरूक हो सकेंगे और बिना तैयारी के यात्रा करने से बचेंगे।
यात्रा से पहले स्वास्थ्य जांच पर जोर
स्वास्थ्य सचिव सचिन कुर्वे ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे यात्रा पर जाने से पहले अपनी पूरी स्वास्थ्य जांच जरूर कराएं। खासकर बुजुर्गों, बच्चों और पहले से बीमार लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा जारी दिशानिर्देशों का पालन करना बेहद जरूरी है, ताकि यात्रा के दौरान किसी भी तरह की परेशानी से बचा जा सके।
स्वास्थ्य जागरूकता से कम होंगे जोखिम
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर श्रद्धालु पहले से ही जरूरी जानकारी और सावधानियों को अपनाते हैं, तो यात्रा के दौरान होने वाली अधिकतर स्वास्थ्य समस्याओं से बचा जा सकता है।
इस हेल्थ अलर्ट अभियान के जरिए सरकार का लक्ष्य है कि चारधाम यात्रा न केवल धार्मिक दृष्टि से सफल हो, बल्कि स्वास्थ्य के लिहाज से भी सुरक्षित और सहज अनुभव बने।