उत्तर प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर बढ़ते विरोध और शिकायतों के बीच बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया गया है। लोगों की लगातार शिकायतों और बिलिंग से जुड़ी दिक्कतों को देखते हुए सरकार ने फिलहाल इस योजना पर रोक लगा दी है और पूरे सिस्टम की समीक्षा का आदेश दिया है।
ऊर्जा मंत्री की हाईलेवल बैठक, कई बड़े निर्देश जारी
लखनऊ स्थित शक्ति भवन में ऊर्जा मंत्री AK Sharma ने बिजली विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। इस बैठक में स्मार्ट मीटर से जुड़ी समस्याओं, बिलिंग गड़बड़ियों और उपभोक्ता शिकायतों पर विस्तार से चर्चा हुई। मंत्री ने साफ कहा कि जनता की परेशानी को प्राथमिकता दी जाएगी और किसी भी तकनीकी खामी को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।
स्मार्ट मीटर लगाने पर अस्थायी रोक, तकनीकी जांच होगी
सरकार ने फैसला लिया है कि जब तक पूरी जांच और तकनीकी परीक्षण नहीं हो जाता, तब तक पुराने मीटरों को स्मार्ट प्रीपेड मीटर से नहीं बदला जाएगा। इसके लिए एक विशेष तकनीकी समिति बनाई जाएगी, जो पूरे सिस्टम की खामियों और सुधारों की रिपोर्ट तैयार करेगी। यह कदम इसलिए लिया गया है ताकि उपभोक्ताओं को गलत बिलिंग, अचानक कटौती और बैलेंस संबंधी समस्याओं से राहत मिल सके।
उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए नए नियम
बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए, जिनका सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। अब यदि प्रीपेड मीटर का बैलेंस खत्म भी हो जाता है, तो तुरंत बिजली नहीं काटी जाएगी।
उपभोक्ताओं को 3 दिन या 200 रुपये तक नेगेटिव बैलेंस की सुविधा मिलेगी
रविवार, त्योहार और छुट्टियों में बिजली नहीं काटी जाएगी
बैलेंस कम होने पर SMS और कॉल के जरिए अलर्ट भेजा जाएगा
भुगतान के बाद तुरंत बिजली बहाल की जाएगी
शिकायतों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश
ऊर्जा मंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि स्मार्ट मीटर से जुड़ी हर शिकायत का तुरंत समाधान किया जाए। उन्होंने कहा कि भुगतान के बाद अगर बिजली बहाल करने में देरी होती है, तो संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही 24x7 तकनीकी टीम को अलर्ट मोड पर रखा जाएगा ताकि गर्मी के मौसम में किसी भी उपभोक्ता को परेशानी न हो।