कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी ने गुरुवार रात मीडिया से मुखातिब होते हुए चोरबागान सर्वजनिन दुर्गोत्सव में मची भगदड़ और केंद्रीय जांच एजेंसियों की कथित पक्षपातपूर्ण कार्रवाई को लेकर बीजेपी और पुलिस-प्रशासन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि कानून से ऊपर कोई नहीं है, चाहे वह किसी भी पार्टी से जुड़ा हो।
"19 लोगों की मौत के जिम्मेदार खुले घूम रहे": अभिषेक का बीजेपी पर सीधा हमला
अभिषेक बनर्जी ने चोरबागान सर्वजनिन दुर्गोत्सव समिति की भूमिका और भगदड़ में 19 से 20 लोगों (जिनमें एक 7 साल का मासूम बच्चा भी शामिल था) की दर्दनाक मौत पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूजा समिति को राजनीतिक फायदे और प्रचार के लिए बीजेपी नेताओं ने जबरन अपने नियंत्रण में लिया था। बनर्जी ने पूजा समिति के प्रमुख पदों पर आसीन बीजेपी नेताओं के नाम उजागर करते हुए पूछा:
- कमेटी चेयरमैन: बीजेपी विधायक विजय ओझा।
- मुख्य सलाहकार: बीजेपी जिला अध्यक्ष तमोग्नो घोष।
- चीफ पैट्रन (मुख्य संरक्षक): सुवेंदु अधिकारी के भतीजे देवदीप अधिकारी।
अभिषेक ने सवाल उठाया कि जब इस लापरवाही के चलते इतने लोगों की जान चली गई, तो सिर्फ निचले स्तर के 'चुनोपुटी' (छोटे कर्मचारियों) को पकड़कर औपचारिकता क्यों निभाई जा रही है? उन्होंने मांग की कि एसआईटी (SIT) और पुलिस बिना किसी राजनीतिक दबाव के इन तीनों प्रमुख नेताओं को तुरंत गिरफ्तार करे और कड़ी पूछताछ करे।
'चैरिटी बिगिन्स एट होम': सुवेंदु अधिकारी और केंद्र सरकार पर पलटवार
विपक्ष द्वारा तृणमूल कांग्रेस पर लगाए जाने वाले 'भतीजे को जेल भेजो' के नारों पर पलटवार करते हुए अभिषेक बनर्जी ने कहा, "जो लोग दूसरों पर उंगली उठाते हैं, उन्हें पहले अपने गिरेबान में झांकना चाहिए। चैरिटी बिगिन्स एट होम। जिन्होंने कैमरे के सामने खुलेआम पैसे लिए और जिनके परिवार के लोग निर्दोषों की मौत के जिम्मेदार हैं, क्या उन्हें जेल भेजने की हिम्मत है?" उन्होंने कहा कि अगर तृणमूल का कोई व्यक्ति गलत करता है तो उस पर निष्पक्ष जांच हो, अदालत और कानून अपना काम करे। लेकिन सिर्फ ममता बनर्जी का समर्थन करने वाले नेताओं और कार्यकर्ताओं (जैसे काजल शेख) को निशाना बनाकर उनके घरों पर छापे मरवाना और सुरक्षा वापस लेना विशुद्ध बदले की राजनीति है।
पुलिस अफसरों को खुली चेतावनी: 'सरकार बदलते ही जवाबदेही तय होगी'
अभिषेक बनर्जी ने जांच में शामिल पुलिस अधिकारियों, विशेषकर पश्चिम मेदिनीपुर के पुलिस अधीक्षक (SP) और अन्य अफसरों की भूमिका पर कड़ा एतराज जताया। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ अधिकारी राजनीतिक आकाओं को खुश करने के लिए विपक्षी नेताओं और तृणमूल कार्यकर्ताओं को झूठे मुकदमों में फंसा रहे हैं।
उन्होंने अधिकारियों को सचेत करते हुए कहा:
"सत्ता किसी की बपौती नहीं होती। कानून को ताक पर रखकर काम करने वाले और राजनीतिक इशारों पर नाचने वाले अधिकारी यह याद रखें कि सरकार बदलते ही किसी को बख्शा नहीं जाएगा। हम हर एक अधिकारी की गैर-कानूनी भूमिका की डायरी रख रहे हैं, और समय आने पर उन्हें जवाब देना होगा। अदालत और संविधान के दायरे में रहकर निष्पक्ष काम कीजिए।"
अभिषेक बनर्जी ने साफ किया कि अगर 20 पीड़ित परिवारों की आत्मा को शांति दिलानी है, तो चोरबागान के आधे-अधूरे सीसीटीवी फुटेज को सामने लाया जाए और बीजेपी से जुड़े मुख्य आयोजकों को तुरंत कानून के कटघरे में खड़ा किया जाए।