कोलकाता में ईंधन की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी का असर अब आम लोगों पर साफ दिखाई दे रहा है। खासकर ऑटो-रिक्शा से सफर करने वाले यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बार-बार किराया बढ़ने से रोज़ाना यात्रा करने वालों में नाराज़गी बढ़ती जा रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक, रसोई गैस (LPG) संकट के बाद अब ऑटो गैस की कीमतों में तेज़ उछाल आया है, जिससे तीन पहिया वाहन चालकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। महज़ एक हफ्ते के भीतर ऑटो गैस की कीमत में करीब 13 प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है। इसके चलते सोमवार से शहर के कई अहम रूटों पर ऑटो किराया 5 से 10 तक बढ़ा दिया गया है।
पिछले बुधवार तक ऑटो गैस की कीमत 62.68 प्रति लीटर थी, जो शुक्रवार तक बढ़कर 70.68 प्रति लीटर हो गई। इससे एक हफ्ते पहले ही 5 की बढ़ोतरी हो चुकी थी। यानी कम समय में कुल 13 की वृद्धि ने चालकों की लागत पर बड़ा असर डाला है।
इसका सीधा असर उल्टाडांगा से सॉल्ट लेक सेक्टर V रूट पर देखने को मिला है, जहां यात्रियों को अब 5 अतिरिक्त देना पड़ रहा है। उल्टाडांगा स्टेशन के पास ऑटो स्टैंड पर जारी नोटिस के अनुसार, इस रूट पर किराया बढ़कर 40 हो गया है। वहीं ‘12 नंबर टैंक’ या सुश्रुत अस्पताल तक का किराया 25 से बढ़कर 30 कर दिया गया है।
सिर्फ यही नहीं, पूरे शहर में लगभग यही स्थिति देखने को मिल रही है। फूलबागान से गिरीश पार्क और मानिकतला रूट पर 2 से 3 की बढ़ोतरी हुई है। वहीं सिंथी मोड़ से दमदम स्टेशन तक का किराया 10 से बढ़ाकर 15 कर दिया गया है।
दक्षिण कोलकाता के कई रूट—जैसे गोलपार्क-गारिया, टॉलीगंज-जादवपुर, रानीकुठी-बाघाजतिन और पार्क सर्कस-धर्मतला—पर यूनियनों ने आधिकारिक तौर पर किराया नहीं बढ़ाया है, लेकिन यात्रियों का आरोप है कि कई ड्राइवर 5 से 10 रुपये अतिरिक्त वसूल रहे हैं।
सेक्टर V की एक आईटी कंपनी में काम करने वाली तान्या चौधरी ने कहा कि अचानक बढ़े यात्रा खर्च से उनके मासिक बजट पर असर पड़ेगा और सरकार को इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए।
वहीं ऑटो यूनियनों का कहना है कि यह कदम मजबूरी में उठाया गया है। उनका दावा है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की आपूर्ति कम होने के कारण कीमतें तेजी से बढ़ी हैं और पुराने किराए पर गाड़ी चलाना संभव नहीं है। कुछ नेताओं ने यह भी कहा कि यूनियन ने आधिकारिक तौर पर किराया बढ़ाने का फैसला नहीं लिया, लेकिन कई चालक बढ़ती लागत के कारण अतिरिक्त किराया ले रहे हैं।
इस पूरे मामले पर परिवहन विभाग भी फिलहाल सीमित भूमिका में नजर आ रहा है। विभाग के एक अधिकारी के अनुसार, ऑटो किराए को नियंत्रित करने के लिए कोई ठोस कानूनी ढांचा नहीं है, जिसके चलते यूनियनें अपने स्तर पर किराया तय करती हैं। हालांकि, विभाग स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
फिलहाल, ईंधन की बढ़ती कीमतों के कारण आम लोगों की परेशानियां कम होने के कोई संकेत नहीं मिल रहे हैं। आने वाले दिनों में यह समस्या और बढ़ सकती है।