विश्व क्षय रोग दिवस के मौके पर सामने आए आंकड़े मध्यप्रदेश में टीबी की भयावह स्थिति को उजागर करते हैं। प्रदेश में हर दिन औसतन 13 लोगों की मौत टीबी (क्षय रोग) से हो रही है। वर्ष 2025 में इलाज और निगरानी के तमाम प्रयासों के बावजूद 4,733 मरीजों की जान चली गई।
प्रदेश में 1.71 लाख टीबी मरीज, भोपाल सबसे आगे
मध्यप्रदेश में वर्ष 2025 के दौरान 1.71 लाख टीबी मरीज नोटिफाई किए गए। हालांकि यह संख्या 2024 के मुकाबले थोड़ी कम है, लेकिन मौतों का सिलसिला थमा नहीं है। सबसे चिंताजनक स्थिति राजधानी भोपाल की है, जहां 332 मरीजों की मौत दर्ज की गई। इसी कारण भोपाल को प्रदेश का टीबी हाई-बर्डन कैपिटल माना जा रहा है।
एमडीआर और एक्सडीआर-टीबी ने बढ़ाई चिंता
राज्य में मल्टी ड्रग रेसिस्टेंट (एमडीआर) टीबी के 2,513 मामले सामने आए हैं। ये वे मरीज हैं, जिन्होंने समय पर दवाएं नहीं लीं। इसके अलावा एक्सटेंसिव ड्रग रेसिस्टेंट (एक्सडीआर) टीबी के भी करीब 5 केस मिले हैं, जिन्हें बेहद खतरनाक माना जाता है।
भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर हाई-रिस्क शहर
एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. विकास मिश्रा के अनुसार,और भी टीबी के लिहाज से हाई-बर्डन शहर बने हुए हैं। राहत की बात यह है कि अब 6 महीने की नई बी-पाल्म रेजिमेन से इलाज पहले से आसान हुआ है।
आदिवासी इलाकों में ज्यादा मौतें
प्रदेश के आदिवासी बहुल जिलों में टीबी से मृत्यु दर ज्यादा है।
मंदसौर और नीमच में मृत्यु दर 6% तक
बैतूल में 5%
अलीराजपुर, डिंडोरी और शहडोल में 3 से 4%
विशेषज्ञों के अनुसार, इन इलाकों में कुपोषण टीबी को और घातक बना रहा है।
गांव-गांव चलेगा 100 दिवसीय टीबी मुक्त अभियान के तहत 24 मार्च से 100 दिवसीय टीबी मुक्त अभियान शुरू किया जा रहा है।
डॉ. रूबी खान, प्रभारी स्टेट टीबी ऑफिसर, मध्यप्रदेश के अनुसार -
हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीनों से गांव-गांव स्क्रीनिंग
टीबी के साथ एनीमिया, बीएमआई, ब्लड प्रेशर और शुगर की जांच
हाई-रिस्क इलाकों की पहचान
मरीजों के क्लोज कॉन्टैक्ट्स की सक्रिय जांच
आंकड़े साफ बताते हैं कि टीबी अभी भी मध्यप्रदेश के लिए बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बनी हुई है। इलाज के साथ-साथ पोषण, जागरूकता और दवा की नियमितता पर फोकस किए बिना टीबी उन्मूलन का लक्ष्य हासिल करना मुश्किल होगा।