सिलीगुड़ी: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के लिए भारतीय जनता पार्टी ने अपनी बिसात बिछानी शुरू कर दी है। राज्य की सत्ता का रास्ता उत्तर बंगाल की 54 सीटों से होकर गुजरता है, और इसी को ध्यान में रखते हुए BJP ने अपनी रणनीति को और धार देना शुरू कर दिया है। सिलीगुड़ी में हुई एक हाई-लेवल बैठक में पार्टी ने "नया नॉर्थ बंगाल" का विजन पेश किया है, जिसका मुख्य उद्देश्य तृणमूल कांग्रेस (TMC) के खिलाफ क्षेत्रीय उपेक्षा के मुद्दों को हवा देना है।
अपेक्षा बनाम उपेक्षा: बजट और विकास पर घेराबंदी
BJP की रणनीति के केंद्र में ममता सरकार पर उत्तर बंगाल की अनदेखी करने का आरोप है। पार्टी का दावा है कि राज्य के कुल बजट का महज 0.002% हिस्सा ही इस क्षेत्र को मिला है। इसके अलावा, आपदा राहत कोष के 5,899 करोड़ रुपये के इस्तेमाल, बागडोगरा एयरपोर्ट के विस्तार में देरी और चाय बागान श्रमिकों की समस्याओं को लेकर भाजपा घर-घर जाकर प्रचार करने की योजना बना रही है। 'हर घर जल' योजना की विफलता और तस्करी जैसे मुद्दों पर भी सरकार को घेरने की तैयारी है।
सियासी समीकरण: क्यों खास है उत्तर बंगाल?
उत्तर बंगाल कभी कांग्रेस और लेफ्ट का गढ़ हुआ करता था, लेकिन पिछले दशक में यहाँ के समीकरण तेजी से बदले हैं।
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2019 लोकसभा: BJP ने 8 में से 7 सीटें जीतकर 35 विधानसभा क्षेत्रों में बढ़त बनाई।
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2021 विधानसभा: कड़ी टक्कर में BJP को 30 और TMC को 24 सीटें मिलीं।
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2024 लोकसभा: BJP ने अपना दबदबा कायम रखते हुए 6 सीटें जीतीं।
सुनील बंसल और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव की मौजूदगी में तय हुई इस नई रणनीति का मकसद 54 की 54 सीटों पर जीत दर्ज करना है। जहाँ TMC अपनी खोई हुई जमीन तलाश रही है, वहीं BJP अपने 'सॉलिड' वोट बैंक और 'ग्राउंड-लेवल कनेक्ट' के भरोसे दो-तिहाई बहुमत का सपना देख रही है।