कोलकाता: भाजपा नेता दिलीप घोष ने नेपाल में हुए भीषण हादसे, दार्जिलिंग और हिमालयी क्षेत्रों में बढ़ते प्राकृतिक खतरे, जादवपुर विश्वविद्यालय में ‘वंदे मातरम्’ गायन, तृणमूल कांग्रेस की आंतरिक राजनीति और अग्निकांड जैसी घटनाओं को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने विकास कार्यों के दौरान पर्यावरण और पहाड़ी इलाकों की संवेदनशीलता को ध्यान में रखने की जरूरत बताई। साथ ही उन्होंने राजनीतिक दलों के बीच चल रही बयानबाजी और आगामी नगर निकाय चुनाव को लेकर भी तंज कसा।
नेपाल हादसे से दार्जिलिंग को सीख लेने की जरूरत
दिलीप घोष ने नेपाल में हुए हादसे के संदर्भ में दार्जिलिंग और हिमालयी क्षेत्रों में बढ़ते प्राकृतिक खतरों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पिछले पांच-सात वर्षों में जम्मू से लेकर सिक्किम तक हिमालयी क्षेत्र में बादल फटने और अन्य प्राकृतिक आपदाओं की घटनाएं बढ़ी हैं। उनके मुताबिक, उत्तराखंड में पिछले वर्ष बड़ी आपदा आई, जबकि सिक्किम में लगातार दो वर्षों से ऐसी घटनाएं देखने को मिल रही हैं। उन्होंने कहा कि कई जगहों पर गांव और बस्तियां तक बह गईं और सैन्य शिविर भी प्रभावित हुए। दिलीप घोष ने पहाड़ों पर बढ़ते निर्माण और विकास कार्यों को भी खतरे से जोड़ते हुए कहा कि फोर लेन सड़क, सुरंग और पहाड़ों की कटाई से पर्वतीय क्षेत्र कमजोर हो सकते हैं। उन्होंने सरकार से विकास कार्यों के लिए एक स्पष्ट नीति बनाने की मांग की।
जादवपुर में दस हजार लोगों के साथ ‘वंदे मातरम्’ पर समर्थन
जादवपुर विश्वविद्यालय में बड़ी संख्या में लोगों के साथ मुख्यमंत्री द्वारा ‘वंदे मातरम्’ गाए जाने के कार्यक्रम को दिलीप घोष ने अच्छा कदम बताया। उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ का ऐतिहासिक जुड़ाव पश्चिम बंगाल से रहा है और ऐसे में राज्य के किसी विश्वविद्यालय में इसे लेकर विवाद होना उचित नहीं है। उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर में कथित देशविरोधी नारों को लेकर भी आपत्ति जताई। दिलीप घोष ने कहा कि इस मुद्दे पर संघर्ष या टकराव के बजाय आम लोगों को साथ लेकर देशभक्ति की भावना मजबूत करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ी में राष्ट्रभावना पैदा करना जरूरी है। उन्होंने ‘वंदे मातरम्’ के लिए संघर्ष करने वाले स्वतंत्रता सेनानियों को भी याद किया। उनके अनुसार, इस गीत के माध्यम से उन लोगों को श्रद्धांजलि दी जानी चाहिए जिन्होंने इसके लिए बलिदान दिया।
जादवपुर में राष्ट्रगान के बाद ‘वंदे मातरम्’ पर दिलीप घोष का बयान
जादवपुर विश्वविद्यालय में वामपंथी सभा के बाद राष्ट्रगान गाए जाने पर दिलीप घोष ने इसे सकारात्मक बताया। हालांकि, उन्होंने इसी दौरान प्रधानमंत्री द्वारा इस्तेमाल किए गए ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का उल्लेख करते हुए विश्वविद्यालय में वैचारिक टकराव को लेकर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि समाज में ऐसी विचारधारा को बढ़ावा नहीं मिलना चाहिए जो देश को कमजोर करती हो। दिलीप घोष ने जादवपुर विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय को देशविरोधी गतिविधियों का केंद्र नहीं बनने देना चाहिए। एपीडीआर को लेकर भी उन्होंने संगठन की पृष्ठभूमि और उसके कामकाज पर सवाल उठाए। साथ ही उन्होंने कहा कि किसी के साथ संघर्ष करना उनका उद्देश्य नहीं है, बल्कि विश्वविद्यालय के सम्मान और राष्ट्रभावना को बनाए रखना जरूरी है।
तृणमूल के छात्र समावेश को लेकर दिलीप घोष का तंज
एकुशे जुलाई के बाद तृणमूल कांग्रेस के छात्र समावेश को लेकर पार्टी के दो गुटों में कथित खींचतान पर दिलीप घोष ने तंज कसा। उन्होंने कहा कि पहले तृणमूल कांग्रेस को यह देखना चाहिए कि वास्तव में कितने छात्र उसके साथ हैं। उन्होंने दावा किया कि जिस राजनीतिक दल का भविष्य नहीं है, छात्र अपना भविष्य ऐसे दल के साथ क्यों जोड़ेंगे। दिलीप घोष ने पार्टी के भीतर चल रही बयानबाजी को ‘मॉक फाइट’ करार दिया। उन्होंने कहा कि इस तरह की बयानबाजी केवल मीडिया में सुर्खियां पाने और समय काटने के लिए की जा रही है। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि सरकार के काम की लगातार तारीफ करना भी मुश्किल है, इसलिए खबरों में बदलाव के लिए इस तरह के मुद्दे सामने लाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि इससे केवल मीडिया को चर्चा का विषय मिलता है।
नगर निगम चुनाव की तैयारी पर बोले दिलीप घोष
तृणमूल कांग्रेस के कालीघाट गुट द्वारा नगर निगम चुनाव के लिए उम्मीदवार तैयार करने की कवायद पर दिलीप घोष ने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल के लिए चुनाव की तैयारी करना स्वाभाविक है। हालांकि, उन्होंने सवाल उठाया कि पार्टी चुनाव मैदान में किन उम्मीदवारों को उतारेगी। दिलीप घोष ने तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का नाम लेते हुए कहा कि केवल बैठकें करने और रणनीति बनाने से चुनाव नहीं जीता जा सकता। उन्होंने दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस को कई इलाकों में उम्मीदवार ढूंढने में भी परेशानी होगी। उनके मुताबिक, चुनावी तैयारी के साथ मजबूत और स्वीकार्य उम्मीदवार होना भी जरूरी है। उन्होंने पार्टी नेतृत्व की तैयारियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि केवल बड़े नेताओं के सक्रिय होने से चुनावी जीत सुनिश्चित नहीं होती।
अभिषेक बनर्जी की तस्वीर को लेकर तृणमूल पर निशाना
अभिषेक बनर्जी की तस्वीर को लेकर कालीघाट गुट की आलोचना और ऋतब्रत बनर्जी गुट की प्रतिक्रिया के बीच दिलीप घोष ने तृणमूल कांग्रेस की राजनीतिक संस्कृति पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी में लंबे समय से ऐसे लोगों को महत्वपूर्ण पद दिए जाते रहे हैं, जिनका संबंधित क्षेत्र से कोई प्रत्यक्ष अनुभव नहीं रहा। खेल संगठनों और अन्य संस्थाओं में पदों को लेकर भी उन्होंने सवाल उठाए। दिलीप घोष ने तृणमूल नेतृत्व पर परिवारवाद और प्रभाव के आधार पर पद बांटने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पार्टी की यही संस्कृति अब उसके संगठन में भी दिखाई दे रही है। उन्होंने जादवपुर से जुड़े छात्र नेतृत्व पर भी टिप्पणी करते हुए तंज कसा। हालांकि, उनके कई आरोप राजनीतिक दावों और आलोचनाओं के रूप में हैं।
एनसीपीआई सांसदों को नोटिस पर दिलीप घोष का हमला
एनसीपीआई सांसदों को नोटिस दिए जाने के मुद्दे पर दिलीप घोष ने क्षेत्रीय दलों की राजनीति पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इस तरह के राजनीतिक संगठन अचानक सामने आते हैं और कई बार आम लोगों को उनके बारे में जानकारी तक नहीं होती। उनके मुताबिक, केवल किसी पार्टी का नाम या पहचान अपना लेने से मजबूत राजनीतिक संगठन तैयार नहीं हो जाता। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग अस्थायी रूप से राजनीतिक संकट से बचने के लिए ऐसे मंचों का सहारा ले रहे हैं। दिलीप घोष ने इसे व्यक्तिगत हितों से जुड़ी राजनीति बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह के राजनीतिक प्रयोगों से देश की राजनीति को कोई वास्तविक लाभ नहीं मिलेगा। उनके मुताबिक, राजनीति व्यापक जनहित और मजबूत संगठन के आधार पर होनी चाहिए।
एनसीपीआई और भाजपा के संभावित गठबंधन पर बोले दिलीप घोष
कोलकाता नगर निगम चुनाव में एनसीपीआई के भाजपा के साथ आने की चर्चाओं पर दिलीप घोष ने कहा कि भाजपा इसको लेकर चिंतित नहीं है। उन्होंने एनसीपीआई की स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि फिलहाल यह संगठन राजनीतिक रूप से अपनी दिशा तलाश रहा है। उन्होंने कहा कि एनसीपीआई भाजपा के साथ आएगी या नहीं और अगर आती है तो भाजपा उसे स्वीकार करेगी या नहीं, इसका फैसला पार्टी नेतृत्व करेगा। गठबंधन को लेकर अंतिम निर्णय भी पार्टी संगठन ही लेगा। दिलीप घोष ने एनसीपीआई नेताओं पर राजनीतिक माहौल बनाने और जनता की प्रतिक्रिया परखने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इस तरह की कवायद को फिलहाल केवल राजनीतिक प्रतिक्रिया जांचने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है।
आग की घटनाओं पर फायर लाइसेंस व्यवस्था को लेकर सवाल
तारापीठ, कोलकाता और अब हावड़ा में आग और मौत की घटनाओं के संदर्भ में दिलीप घोष ने अग्नि सुरक्षा व्यवस्था पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कई बहुमंजिला इमारतों और पुराने भवनों में फायर लाइसेंस से जुड़ी समस्याएं हैं। उनके मुताबिक, कोलकाता के कई पुराने और जर्जर मकानों में कारखाने चल रहे हैं, जहां ज्वलनशील सामग्री और मशीनों का इस्तेमाल होता है। उन्होंने ऐसे भवनों की जांच कर बेहद खतरनाक इमारतों को खाली कराने और जरूरत पड़ने पर ध्वस्त करने की बात कही। दिलीप घोष ने कहा कि बारिश के दौरान पुराने और कमजोर भवनों में खतरा और बढ़ जाता है। उन्होंने अग्निशमन विभाग की लाइसेंस प्रक्रिया को भी तेज करने की मांग की। उनके अनुसार, कारोबारियों को जरूरी दस्तावेज जमा करने के लिए समय दिया जाना चाहिए और विभाग को तय समय सीमा में लाइसेंस जारी करना चाहिए।
लाइसेंस प्रक्रिया में देरी से कारोबारियों को नुकसान का दावा
दिलीप घोष ने कहा कि कई कारोबारी जरूरी दस्तावेज जमा करने के बावजूद फायर लाइसेंस का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने सरकारी विभागों में प्रक्रिया में देरी का आरोप लगाते हुए कहा कि इससे कारोबारियों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने सुझाव दिया कि कारोबारियों को करीब दो महीने का समय देकर जरूरी दस्तावेज जमा कराने की स्पष्ट व्यवस्था बनाई जाए। इसके बाद विभागीय अधिकारियों को तेजी से निरीक्षण कर लाइसेंस जारी करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कई होटल और अन्य प्रतिष्ठान लाइसेंस संबंधी समस्याओं के कारण बंद किए गए हैं। दिलीप घोष के अनुसार, यदि कारोबारियों ने नियमों के मुताबिक दस्तावेज जमा कर दिए हैं तो विभाग को भी समयबद्ध तरीके से कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने त्योहारों से पहले छोटे-बड़े कारोबारियों को राहत देने और विभागीय व्यवस्था को सक्रिय करने की जरूरत बताई।
नेपाल हादसे पर राहत सहायता और घुसपैठ के मुद्दे पर भी सवाल
दिलीप घोष से नेपाल में हुए भीषण हादसे के बाद भारत की ओर से राहत और सहायता पहुंचाने के प्रयासों को लेकर भी सवाल किया गया। साथ ही उनसे भारत-नेपाल संबंधों और पड़ोसी देश में संकट के समय भारत की भूमिका पर प्रतिक्रिया मांगी गई। इसके अलावा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उस बयान पर भी सवाल किया गया, जिसमें उन्होंने अगले तीन वर्षों में भारत से घुसपैठियों को बाहर करने और कानून में सख्त प्रावधान किए जाने की बात कही थी। इन मुद्दों को लेकर दिलीप घोष से केंद्र की नीति और आगामी कदमों पर उनकी राय जानी गई।
हिंदू धर्मग्रंथ को ‘एप्लीकेशन’ बताने के बयान पर विवाद
राहुल गांधी द्वारा हिंदू धर्मग्रंथ को ‘एप्लीकेशन’ बताए जाने संबंधी टिप्पणी और महाराष्ट्र में महात्मा गांधी को लेकर दिए गए बयान से पैदा हुए विवाद पर भी दिलीप घोष से सवाल किया गया। उनसे पूछा गया कि धार्मिक ग्रंथों और महात्मा गांधी जैसे ऐतिहासिक व्यक्तित्वों को लेकर राजनीतिक नेताओं की टिप्पणियों को किस नजरिए से देखा जाना चाहिए। यह मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस का विषय बना हुआ है। दिलीप घोष से इस पूरे विवाद पर उनकी प्रतिक्रिया और भाजपा के रुख को लेकर भी सवाल किया गया।