कोलकाता: पश्चिम बंगाल में जारी चुनावी सरगर्मियों के बीच दक्षिण 24 परगना जिले के फल्ता इलाके के कद्दावर तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेता और उम्मीदवार जहांगीर खान को कोलकाता हाई कोर्ट से बहुत बड़ी राहत मिली है। इलाके में ‘पुष्पा’ के नाम से मशहूर जहांगीर खान को अदालत ने आगामी 26 मई तक के लिए 'रक्षा कवच' प्रदान किया है, जिसके तहत पुलिस उनके खिलाफ कोई भी दंडात्मक कार्रवाई या उन्हें गिरफ्तार नहीं कर सकेगी। हालांकि, कोर्ट ने साफ किया है कि जहांगीर खान को पुलिस जांच में पूरी तरह सहयोग करना होगा। सोमवार को हाई कोर्ट के जस्टिस सुगत भट्टाचार्य की बेंच में इस मामले की अहम सुनवाई हुई।
एक ही दिन में दर्ज हुईं 3 एफआईआर, वकील ने दी शुभेंदु अधिकारी की दलील
अदालत के आदेश के मुताबिक, जहांगीर खान के खिलाफ अब तक कुल 5 एफआईआर (FIR) दर्ज हो चुकी हैं और कोर्ट का यह रक्षा कवच इन पांचों मामलों में लागू रहेगा। सुनवाई के दौरान जहांगीर खान के वकील ने आरोप लगाया कि उनके मुवक्किल को राजनीतिक द्वेष के तहत निशाना बनाया जा रहा है और उनके खिलाफ एक के बाद एक झूठे मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं।
वकील ने दलील दी कि 9 साल पुराने मामलों को उखाड़कर अब केस दर्ज किए जा रहे हैं और हद तो तब हो गई जब एक ही दिन के भीतर 3 अलग-अलग एफआईआर दर्ज कर दी गईं। इस दौरान जहांगीर के वकील ने पूर्ववर्ती समय का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी का उदाहरण भी कोर्ट के सामने रखा, जब विपक्ष में रहते हुए कोर्ट ने उन्हें भी इसी तरह के मामलों में रक्षा कवच दिया था। वकील ने अदालत से यह भी स्पष्ट करने की मांग की कि उनके मुवक्किल के खिलाफ असल में कितने मामले दर्ज हैं।
सरकारी वकील का आरोप- 'जहांगीर ने की बूथ कैप्चरिंग और वोटरों को डराया'
दूसरी तरफ, राज्य सरकार के वकील ने जहांगीर खान को राहत दिए जाने का कड़ा विरोध किया। उन्होंने अदालत के समक्ष दलील दी कि चुनाव के दिन जहांगीर खान और उनके समर्थकों ने इलाके में भारी उत्पाद मचाया था। उन पर मतदाताओं को डराने-धमकाने, बूथ पर कब्जा करने (बूथ कैप्चरिंग) और बैलेट पेपर के साथ छेड़छाड़ करने के गंभीर आरोप हैं। सरकारी वकील ने कहा कि स्थिति इतनी बिगड़ गई थी कि चुनाव आयोग को वहां का मतदान रद्द कर दोबारा वोटिंग (री-पोलिंग) कराने का आदेश देना पड़ा।
लोकतंत्र में सबको मिलना चाहिए मौका: हाई कोर्ट
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जस्टिस सुगत भट्टाचार्य ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की। उन्होंने कहा, "चुनाव एक अत्यंत पवित्र और लोकतांत्रिक प्रक्रिया है। ऐसे में लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत याचिकाकर्ता को चुनाव में भाग लेने का पूरा अवसर मिलना चाहिए।" इसके बाद हाई कोर्ट ने चुनावी प्रक्रिया संपन्न होने तक जहांगीर खान की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी। इस मामले की अगली सुनवाई अब 26 मई को होगी, जिस पर अब पूरे राजनीतिक हलके की नजरें टिकी हुई हैं।