रायपुर। छत्तीसगढ़ में नक्सल उन्मूलन को लेकर सियासी बयानबाज़ी तेज हो गई है। अमित शाह ने जगदलपुर दौरे के दौरान पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार पर नक्सलवाद के खिलाफ केंद्र का सहयोग नहीं करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि देश के कई राज्यों में गैर-बीजेपी सरकारों ने भी नक्सलवाद के खिलाफ केंद्र का साथ दिया, लेकिन छत्तीसगढ़ की तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने अपेक्षित सहयोग नहीं किया।
अमित शाह ने दावा किया कि भाजपा सरकार बनने के बाद नक्सलवाद के खिलाफ कार्रवाई में तेजी आई और बस्तर में हालात तेजी से बदले हैं। उन्होंने इसका श्रेय सुरक्षा बलों के जवानों को दिया, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में बलिदान देकर अभियान को सफल बनाया। साथ ही शाह ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार बस्तर के विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।
मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक के बाद बढ़ी राजनीतिक गर्माहट
जगदलपुर में आयोजित मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक के बाद केंद्रीय गृहमंत्री की प्रेस कॉन्फ्रेंस ने राजनीतिक माहौल और गर्म कर दिया। अमित शाह ने इस दौरान प्रदेश के गृह मंत्री विजय शर्मा की कार्यशैली की तारीफ भी की।
हाल के महीनों में अमित शाह लगातार यह कहते रहे हैं कि देश अब नक्सलवाद के अंत की ओर बढ़ रहा है और बस्तर विकास के नए दौर में प्रवेश कर चुका है।
भूपेश बघेल का पलटवार, बोले- भाजपा से बड़ा झूठ कोई नहीं
केंद्रीय गृहमंत्री के बयान पर पूर्व मुख्यमंत्री Bhupesh Baghel ने तीखी प्रतिक्रिया दी। भूपेश बघेल ने अमित शाह के आरोपों को पूरी तरह झूठ बताया और कहा कि भाजपा से बड़ा झूठ कोई नहीं बोल सकता।
बघेल ने दावा किया कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में बस्तर में कई नए सुरक्षा कैंप खोले गए। बंद पड़े स्कूलों को दोबारा शुरू किया गया और आंगनबाड़ी, क्लीनिक तथा पीडीएस दुकानों की शुरुआत कर ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाएं पहुंचाई गईं।
उन्होंने कहा कि आदिवासियों का विश्वास जीतने, जल-जंगल-जमीन के अधिकार सुनिश्चित करने और विकास कार्यों को बढ़ाने की नीति ने नक्सल प्रभाव को कमजोर करने में बड़ी भूमिका निभाई। बघेल ने यह भी कहा कि भाजपा सरकार जो भी काम नक्सल उन्मूलन के लिए कर रही है, वह कांग्रेस सरकार के मॉडल से सीखकर ही कर रही है।
नक्सल उन्मूलन का श्रेय किसे?
अब बड़ा सवाल यही है कि बस्तर में नक्सलवाद के कमजोर पड़ने का असली श्रेय किसे जाता है? सुरक्षा बलों की रणनीति, केंद्र सरकार की सख्त नीति या फिर पूर्ववर्ती सरकारों के विकास मॉडल को?
फिलहाल इस मुद्दे पर सियासत चरम पर है और मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक के बाद यह बहस और तेज होती नजर आ रही है।