केंद्र सरकार देश के 18 शहरों में वाटर मेट्रो सेवा शुरू करने की तैयारी कर रही है। पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय ने इसके लिए राष्ट्रीय वाटर मेट्रो नीति का मसौदा तैयार किया है। इसे विभिन्न मंत्रालयों के पास सुझाव और मंजूरी के लिए भेजा गया है। योजना का उद्देश्य नदियों और जलमार्गों वाले शहरों में सार्वजनिक परिवहन को नया विकल्प देना है।
दो चरणों में लागू होगी योजना
सरकार इस योजना को दो चरणों में लागू करेगी। पहले चरण में वाराणसी, अयोध्या, प्रयागराज, श्रीनगर और पटना में वाटर मेट्रो सेवा शुरू करने की तैयारी है। दूसरे चरण में तेजपुर और डिब्रूगढ़ को जोड़ा जाएगा।
कोच्चि मॉडल पर देशभर में विस्तार
कोच्चि में वाटर मेट्रो की सफलता के बाद अब इसे राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ाया जा रहा है। सरकार का मानना है कि जहां नदियां या नहरें हैं, वहां जलमार्गों का बेहतर उपयोग कर ट्रैफिक दबाव कम किया जा सकता है। यह योजना शहरी परिवहन को आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।
कम लागत और पर्यावरण अनुकूल व्यवस्था
केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि वाटर मेट्रो में लागत कम आती है, क्योंकि मौजूदा जलमार्गों का इस्तेमाल होता है। इसमें बड़े निर्माण कार्य और जमीन अधिग्रहण की जरूरत कम पड़ती है। बिजली और हाइब्रिड ईंधन से चलने वाली नावों के इस्तेमाल से प्रदूषण भी घटेगा और शहरों में जाम की समस्या कम होगी।
किन शहरों को मिलेगा फायदा
यह सेवा आम यात्रियों के साथ पर्यटकों के लिए भी उपयोगी होगी। सरकार ने इसे उन शहरों में प्राथमिकता देने का फैसला किया है, जिनकी आबादी 10 लाख से अधिक है। हालांकि बाढ़ प्रभावित या दूरदराज के इलाकों में नियमों में छूट दी जा सकती है। भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण ने परियोजना के लिए कोच्चि मेट्रो रेल लिमिटेड की मदद से सर्वे कराया है। अब तक 18 शहरों का सर्वे पूरा हो चुका है और 17 शहरों की रिपोर्ट मिल गई है। केवल लक्षद्वीप की रिपोर्ट आना बाकी है।