भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार ने प्रदेशभर में कार्यरत करीब 5 हजार पेसा मोबिलाइजर्स की सेवाएं समाप्त कर दी हैं। पंचायत राज संचालनालय ने सभी संबंधित जिलों को तत्काल प्रभाव से कार्रवाई करने के निर्देश जारी किए हैं। पेसा मोबिलाइजर्स की नियुक्ति 5254 ग्राम पंचायतों में ग्राम सभाओं को सशक्त बनाने और सरकारी योजनाओं को जनजातीय क्षेत्रों तक पहुंचाने के लिए की गई थी। हालांकि, इनके मानदेय को 4 हजार रुपए से बढ़ाकर 8 हजार रुपए करने की घोषणा पूरी नहीं हो सकी, और अब इनकी सेवाएं भी समाप्त कर दी गई हैं। एमपी आउसोर्स, अस्थायी कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष वासुदेव शर्मा ने कहा कि यदि पेसा मोबिलाइजर्स को सेवा में वापस नहीं रखा गया और सरकार ने उनका सेवा समाप्त करने का आदेश निरस्त नहीं किया, तो इसके खिलाफ आंदोलन किया जाएगा।
पंचायत राज संचालनालय के निर्देश
संचालनालय ने सभी जिलों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को पत्र भेजकर बताया कि भारत सरकार की आरजीएसए (संशोधित) योजना, जिसके तहत पेसा मोबिलाइजर्स को मानदेय दिया जाता था, की अवधि 1 अप्रैल 2022 से 31 मार्च 2026 तक थी। योजना की अवधि समाप्त होने और नए स्वरूप पर नीति निर्माण प्रक्रिया चलने के कारण, वर्तमान में पेसा मोबिलाइजर्स की सेवाएं जारी रखना संभव नहीं है।
प्रभावित जिलों की सूची
यह आदेश विशेष रूप से झाबुआ, अलीराजपुर, बड़वानी, मंडला, डिंडोरी, अनुपपुर, धार, खरगोन, रतलाम, खंडवा, बुरहानपुर, नर्मदापुरम, बैतूल, सिवनी, छिंदवाड़ा, बालाघाट, सीधी, शहडोल, उमरिया और श्योपुर के लिए जारी किया गया है।
पेसा मोबिलाइजर्स का उद्देश्य
पेसा मोबिलाइजर्स की भूमिका जनजातीय क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को मजबूत बनाने, सरकारी योजनाओं का लाभ ग्रामीणों तक पहुंचाने, पेसा एक्ट के अधिकारों के प्रति जागरूक करने और ग्राम सभाओं के आयोजन में सहयोग करने की होती थी। इसके अलावा वे गांवों में छोटे-मोटे विवाद सुलझाने और सरकारी संदेशों को ग्रामीण स्तर तक पहुँचाने का काम भी करते थे।
पेसा एक्ट की शुरुआत
मध्यप्रदेश में पेसा एक्ट का क्रियान्वयन पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में शुरू हुआ था। 15 नवंबर 2022 को शहडोल में इसका औपचारिक शुभारंभ राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मौजूदगी में किया गया। प्रदेश के 20 जिलों के 89 विकासखंडों की 5254 पंचायतों और 11757 गांवों में यह कानून लागू है।