कोलकाता: जमीन हड़पने, रंगदारी और आर्थिक धोखाधड़ी के गंभीर आरोपों में घिरे विश्वजीत पोद्दार उर्फ ‘सोना पप्पू’ आखिरकार सोमवार को प्रवर्तन निदेशालय (ED) के सामने पेश हुए। बताया जा रहा है कि यह पेशी मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े एक बड़े मामले की जांच के तहत हुई है।
लंबे समय से फरार था ‘सोना पप्पू’
ED की जांच शुरू होने के बाद से ही सोना पप्पू फरार चल रहा था। केंद्रीय एजेंसी के मुताबिक, वह जमीन कब्जाने और वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़े मामलों में जांच के दायरे में है। इससे पहले उन पर कई बार समन जारी किए गए थे।
छापेमारी में मिले थे अहम दस्तावेज और हथियार
जांच के दौरान उनके आवास और सहयोगियों के ठिकानों पर छापेमारी की गई थी, जहां से करीब 300 पन्नों के संपत्ति से जुड़े दस्तावेज बरामद हुए थे। वहीं, उनके फर्न रोड स्थित घर से एक देसी पिस्तौल मिलने की भी जानकारी सामने आई थी।
जमीन हड़पने के ‘तीन तरीकों’ का आरोप
ED की जांच में सामने आया है कि आम लोगों से जमीन हथियाने के लिए कथित तौर पर तीन तरीके अपनाए जा रहे थे।
- डराकर जमीन लेना
- पुलिस केस का भय दिखाना
- बाजार से कम कीमत पर दबाव में खरीद
इसी नेटवर्क को लेकर एजेंसी जांच आगे बढ़ा रही है।
पुलिस अधिकारी की गिरफ्तारी के बाद बढ़ी कार्रवाई
इस मामले में पहले जय एस कामदार और बाद में कोलकाता पुलिस के अधिकारी शांतनु सिन्हा विश्वास की गिरफ्तारी भी हो चुकी है। ED का दावा है कि इन गिरफ्तारियों का संबंध सोना पप्पू से जुड़े कथित अपराध नेटवर्क से है।
सोशल मीडिया पर भी रहा सक्रिय
फरार रहने के दौरान भी सोना पप्पू सोशल मीडिया पर लाइव होकर चर्चा में बने रहे। इन लाइव वीडियो में उन्होंने कई राजनीतिक नामों का भी जिक्र किया, जिससे मामला और संवेदनशील हो गया।
ED दफ्तर में सोना पप्पू का बयान
ED दफ्तर में प्रवेश करते समय जब उनसे सवाल किए गए, तो उन्होंने सभी आरोपों से इनकार किया। उन्होंने कहा—
“मैं किसी बमबाजी या कांकुलिया केस में शामिल नहीं था। उस दिन मैं पूजा में बैठा था। पुलिस भी घर आई थी, लेकिन मैं बाहर नहीं निकला।”
आगे की जांच जारी
ED अब सोना पप्पू से जुड़े वित्तीय लेन-देन, जमीन सौदों और कथित नेटवर्क की गहन जांच कर रही है। आने वाले दिनों में इस केस में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।