कोलकाता: आर.जी. कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में सामने आए कथित भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के मामले में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। पश्चिम बंगाल के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने पूर्व प्रिंसिपल डॉ. संदीप घोष के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत अभियोजन (Prosecution Sanction) की औपचारिक मंजूरी दे दी है।
इस फैसले के बाद अब ED को मामले में अदालत में चार्जशीट दाखिल करने और आगे की कानूनी प्रक्रिया को तेज करने का रास्ता साफ हो गया है।
क्या है पूरा मामला?
आर.जी. कर मेडिकल कॉलेज में अगस्त 2024 में हुए एक गंभीर घटना के बाद अस्पताल प्रशासन में बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए थे।
- CBI जांच: कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश पर मामले की जांच CBI को सौंपी गई
- आरोप: IPC 420, 120B और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत केस दर्ज
- LED जांच: 28 अगस्त 2024 को मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया गया
- कंपनियों का नाम: मां तारा ट्रेडर्स, ईशान कैफे और खमा लौहा पर भी जांच का दायरा
सरकार के आदेश में क्या कहा गया?
राज्यपाल और सक्षम प्राधिकारी द्वारा दस्तावेजों की जांच के बाद यह माना गया कि मामले में प्रथम दृष्टया गंभीर आपराधिक और वित्तीय अनियमितताओं के साक्ष्य मौजूद हैं।
- BNSS 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत मंजूरी जारी
- विशेष सचिव द्वारा हस्ताक्षरित आदेश में ‘जनहित’ को आधार बताया गया
- भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई का संदेश दिया गया


अब आगे क्या होगा?
इस मंजूरी के बाद ED अब संदीप घोष के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर सकती है। जांच एजेंसियों की कार्रवाई तेज होने के साथ ही यह मामला अब निर्णायक कानूनी मोड़ पर पहुंच गया है।
सरकारी पक्ष का कहना है कि यह कदम पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
