नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि खतरनाक और बीमार आवारा कुत्तों को दया मृत्यु (यूथेनेशिया) के माध्यम से मारा जा सकता है। अदालत ने कहा कि लोगों की सुरक्षा सर्वोपरि है और जो अधिकारी इस निर्देश का पालन नहीं करेंगे, उनके खिलाफ अवमानना का मामला चलाया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गरिमा के साथ जीने के अधिकार में कुत्तों के खतरे से मुक्त होकर जीवन जीने का अधिकार भी शामिल है। अदालत ने नवंबर 2025 के निर्देशों को रद्द करने की मांग वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया।
पिछली घटनाओं का हवाला
राजस्थान के श्रीगंगानगर में एक महीने में 1084 कुत्तों के काटने की घटनाएं दर्ज की गईं। तमिलनाडु में साल के पहले चार महीनों में लगभग 2 लाख कुत्तों के काटने की घटनाएं हुईं। सूरत में एक जर्मन पर्यटक को कुत्ते ने काट लिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस तरह की घटनाओं से शहरी प्रशासन पर जनता का भरोसा कमजोर होता है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकारें AWBI के नियमों को मजबूत करें और उन्हें सही तरीके से लागू करें। हर जिले में कम से कम एक पूरी तरह कार्यरत ABC सेंटर बनाए जाएं और अधिक आबादी वाले क्षेत्रों में ABC सेंटरों की संख्या बढ़ाई जाए। कोर्ट के आदेश और पशु कल्याण नियमों को पूरी तरह लागू किया जाना चाहिए। जनता की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए नियमों को अन्य सार्वजनिक स्थानों पर भी लागू करने पर फैसला लिया जाए। एंटी-रेबीज दवाइयों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। NHAI को राष्ट्रीय राजमार्गों पर आवारा जानवरों की समस्या से निपटने के लिए कदम उठाने होंगे। रेबीज या बेहद खतरनाक कुत्तों के मामलों में जरूरत पड़ने पर यूथेनेशिया का उपयोग किया जा सकता है। अदालत ने यह भी कहा कि आदेश लागू करने वाले नगर निगम और अधिकारियों को कानूनी सुरक्षा दी जाए।
मामले की पृष्ठभूमि
28 जुलाई 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने देश में आवारा कुत्तों के हमलों और मौतों पर स्वतः संज्ञान लिया। 11 अगस्त 2025 को दिल्ली-NCR से 8 हफ्ते में सभी आवारा कुत्तों को शेल्टर होम में भेजने का आदेश दिया गया। इसके बाद 22 अगस्त 2025 को आदेश में बदलाव किया गया, जिसमें नसबंदी और टीकाकरण के बाद कुत्तों को उनके इलाके में छोड़ा जा सकता है। 7 नवंबर 2025 को पूरे देश में स्कूल, अस्पताल, रेलवे स्टेशन जैसी जगहों से आवारा कुत्तों को हटाने का निर्देश जारी किया गया।
कोर्ट की चेतावनी
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आवारा कुत्तों के हमलों में चोट या मौत होने पर नगर निकाय और डॉग फीडर्स दोनों जिम्मेदार हो सकते हैं। अदालत ने चेताया कि उनकी टिप्पणियों को मजाक न समझा जाए और वे जिम्मेदारी तय करने से पीछे नहीं हटेंगे।