खड़गपुर: छोटे कारोबारियों और स्वरोजगार की राह तलाश रहे लोगों के लिए आईआईटी खड़गपुर ने एक अभिनव पहल की है। संस्थान की नगर उद्यम फेरीवाले से स्मार्ट उद्यमी तक परियोजना के तहत सौर ऊर्जा से संचालित होने वाली चलायमान दुकान विकसित करने की परिकल्पना की गई है। इस मॉडल के जरिए कारोबारी अपनी दुकान को मोटरसाइकिल से जोड़कर एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जा सकेंगे। कारोबार खत्म होने के बाद दुकान को घर पर भी रखा जा सकेगा। इसका उद्देश्य छोटे कारोबारियों को महंगी दुकान किराये पर लेने और स्थायी ठिकाने की परेशानी से राहत दिलाने के साथ स्वरोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराना है।
दुर्गा पूजा के दौरान प्रायोगिक मॉडल का उद्घाटन
इस परियोजना के प्रायोगिक नमूने का उद्घाटन दुर्गा पूजा के अवसर पर आईआईटी खड़गपुर परिसर स्थित प्रौद्योगिकी विद्यार्थी व्यायामशाला में किया गया। संस्थान के निदेशक प्रो. सुमन चक्रवर्ती की परिकल्पना पर आधारित इस पहल के उद्घाटन अवसर पर खड़गपुर के अनुमंडल पुलिस अधिकारी सिद्धार्थ सिंह डांगी, संस्थान के संकाय सदस्य, विद्यार्थी और स्थानीय छोटे कारोबारी मौजूद रहे। इस पहल के जरिए तकनीकी नवाचार को आम लोगों की आजीविका से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
सौर ऊर्जा और बैटरी से चलेंगे जरूरी उपकरण
प्रस्तावित चलायमान दुकान में कम बिजली खपत वाले उपकरणों के संचालन के लिए सौर ऊर्जा और बैटरी भंडारण की व्यवस्था होगी। इससे कारोबारियों को बिजली की उपलब्धता पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। दुकानदार ग्राहकों की मांग और कारोबार की संभावनाओं के अनुसार अलग-अलग स्थानों पर अपनी दुकान लगा सकेंगे। इस मॉडल में लगभग 30 किलोमीटर तक आवागमन की परिकल्पना की गई है। हालांकि, इसकी वास्तविक क्षमता और सड़क पर सुरक्षित संचालन से जुड़े पहलुओं का सत्यापन अभी किया जाना बाकी है।
खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता पर भी रहेगा जोर
इस परियोजना में केवल दुकान को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने की सुविधा ही नहीं, बल्कि कारोबार के दौरान स्वच्छता बनाए रखने पर भी ध्यान दिया गया है। खाद्य पदार्थों को सुरक्षित तरीके से प्रदर्शित करने, कार्यस्थल को साफ रखने और कचरे को तीन अलग-अलग श्रेणियों में बांटने जैसी व्यवस्थाओं की परिकल्पना की गई है। इससे खासकर खाद्य पदार्थ बेचने वाले छोटे कारोबारियों को व्यवस्थित तरीके से अपना व्यवसाय संचालित करने में मदद मिल सकती है।
डिजिटल भुगतान और प्रशिक्षण से जुड़ेंगे कारोबारी
‘नगर उद्यम’ परियोजना के तहत छोटे कारोबारियों को आधुनिक व्यावसायिक सुविधाओं से जोड़ने की भी योजना है। संस्थान की **‘सेतु क्लाउड किचन कनेक्ट’** व्यवस्था के माध्यम से कारोबारियों को डिजिटल पहचान, क्यूआर कोड के जरिए भुगतान, प्रशिक्षण और वित्तीय सेवाओं से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। डिजिटल सुविधाओं के इस्तेमाल से दुकानदार अपने लेनदेन का रिकॉर्ड बेहतर ढंग से रख सकेंगे। इसके साथ ही कारोबार को व्यवस्थित करने और ग्राहकों तक अपनी पहुंच बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है।
कम पूंजी में कारोबार शुरू करने का मिलेगा अवसर
आईआईटी खड़गपुर के निदेशक प्रो. सुमन चक्रवर्ती के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य केवल दुकान के पारंपरिक स्वरूप को बदलना नहीं, बल्कि स्वरोजगार करने वाले लोगों के लिए नए अवसर तैयार करना है। इस तरह की व्यवस्था से कम पूंजी वाले लोगों को अपना व्यवसाय शुरू करने और धीरे-धीरे उसे आगे बढ़ाने में सहायता मिल सकती है। चलायमान दुकान का मॉडल खास तौर पर उन लोगों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है, जो किराये की दुकान लेने या स्थायी व्यावसायिक जगह का खर्च उठाने में सक्षम नहीं हैं।
सफल होने पर पश्चिम बंगाल के दूसरे क्षेत्रों में भी हो सकता है विस्तार
फिलहाल संस्थान परिसर में शुरू की गई प्रायोगिक परियोजना के जरिए इस मॉडल की उपयोगिता, संचालन, खाद्य सुरक्षा और कारोबारियों के अनुभव का आकलन किया जाएगा। इसके नतीजों के आधार पर भविष्य में पश्चिम बंगाल के अन्य क्षेत्रों में भी इसे लागू करने की योजना है। हालांकि, बड़े स्तर पर इसे सफल बनाने के लिए स्थानीय प्रशासन की अनुमति, यातायात नियमों का पालन और सड़क पर सुरक्षित संचालन सुनिश्चित करना जरूरी होगा।
आईआईटी खड़गपुर की ‘नगर उद्यम’ पहल तकनीक के जरिए छोटे कारोबारियों को सशक्त बनाने की दिशा में एक नई संभावना पेश करती है। यदि यह मॉडल व्यावहारिक रूप से सफल होता है, तो इससे कम लागत में स्वरोजगार शुरू करने, डिजिटल भुगतान अपनाने और छोटे व्यवसायों को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद मिल सकती है।