कोलकाता: आपातकालीन परिस्थितियों में पुलिस की त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए लालबाजार ने इमरजेंसी रिस्पॉन्स सपोर्ट सिस्टम यानी ERSS के वाहनों को लेकर सख्त निर्देश जारी किए हैं। इन गाड़ियों और बाइकों का इस्तेमाल अब किसी भी स्थिति में थाने की नियमित ड्यूटी या निजी काम के लिए नहीं किया जा सकेगा। ERSS वाहनों को निर्धारित स्थानों पर तैनात रखना होगा। निर्देशों का उल्लंघन होने पर संबंधित पुलिसकर्मियों को विभागीय कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
महालया पर पुलिस बेड़े में शामिल हुईं 450 गाड़ियां और बाइक
महालया के मौके पर कोलकाता पुलिस के बेड़े में 450 गाड़ियां और बाइक जोड़ी गई हैं। कोलकाता पुलिस के प्रत्येक थाने को एक-एक ई-बाइक और गाड़ी दी गई है। इसका उद्देश्य 112 डायल के जरिए मिलने वाली आपातकालीन सूचना पर पुलिस को कम से कम समय में घटनास्थल तक पहुंचाना है।
संवेदनशील इलाकों में तय होगी ERSS की तैनाती
पुलिस आयुक्त के निर्देश के अनुसार, ERSS की गाड़ी और बाइक किस स्थान पर तैनात रहेंगी, इसका फैसला संबंधित डिविजन के डीसी, थाने के ओसी के साथ चर्चा करके करेंगे। संवेदनशील इलाके, आने-जाने की सुविधा और घटनास्थल तक पहुंचने में लगने वाले समय को ध्यान में रखते हुए तैनाती की सूची तैयार की जाएगी।
कंट्रोल रूम रखेगा हर वाहन पर नजर
लालबाजार के कंट्रोल रूम से प्रत्येक ERSS गाड़ी और बाइक की लोकेशन पर नजर रखी जाएगी। ERSS ड्यूटी में तैनात पुलिसकर्मियों को एक दिन पहले 'ड्यूटी मित्र' ऐप के जरिए ड्यूटी की जानकारी दी जाएगी। हर शिफ्ट की शुरुआत में वाहन या बाइक का ईंधन, ब्रेक, लाइट, सायरन, कम्युनिकेशन सिस्टम, GPS और प्राथमिक उपचार किट की जांच करना अनिवार्य होगा।
'प्रायोरिटी कॉल' मिलते ही रवाना होगी टीम
ERSS टीम को 'प्रायोरिटी कॉल' मिलते ही तुरंत घटनास्थल के लिए रवाना होना होगा। मौके पर पहुंचने के बाद टीम की पहली प्राथमिकता लोगों की जान बचाना और नुकसान को रोकना होगी। इसके बाद जरूरत के अनुसार घटनास्थल को सुरक्षित करने, संबंधित थाने को सूचना देने और एंबुलेंस, दमकल तथा ट्रैफिक पुलिस को जानकारी देने की जिम्मेदारी भी टीम की होगी।
महिला और बच्चों के मामलों में संवेदनशीलता जरूरी
लालबाजार के निर्देश में महिला, बच्चों और किसी भी असहाय व्यक्ति से जुड़े मामलों में पुलिसकर्मियों को संवेदनशीलता के साथ व्यवहार करने पर जोर दिया गया है। वहीं, अगर कोई ERSS वाहन निर्धारित समय पर प्रतिक्रिया नहीं देता है तो कंट्रोल रूम की ओर से टीम से संपर्क किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर संबंधित थाना वैकल्पिक यूनिट को घटनास्थल पर भेजने की व्यवस्था करेगा।
10 मिनट से ज्यादा देरी पर होगी जांच
ERSS टीम के घटनास्थल तक पहुंचने में 10 मिनट से अधिक की देरी होने पर संबंधित डिविजनल डीसी को मामले की जांच कर रिपोर्ट देनी होगी। देरी से प्रतिक्रिया देने के मामलों की नियमित समीक्षा कंट्रोल रूम और डिविजन के पुलिस अधिकारी करेंगे।
निजी या रूटीन काम में इस्तेमाल पर कार्रवाई
लालबाजार ने स्पष्ट किया है कि ERSS की गाड़ी या बाइक का इस्तेमाल निजी काम के लिए नहीं किया जा सकता। यहां तक कि थाने के दूसरे नियमित काम के लिए भी इन वाहनों का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। वाहनों और GPS को हर समय चालू रखना होगा। बिना अनुमति वाहन को दूसरी ड्यूटी में लगाने या उसके दुरुपयोग की शिकायत मिलने पर संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
थाने के ओसी को रखना होगा ERSS टीम से समन्वय
लालबाजार ने थानों के ओसी को ERSS टीम के साथ लगातार समन्वय बनाए रखने का निर्देश दिया है। किसी मामले में जांच की जरूरत होने पर संबंधित थाना जांच करेगा। वहीं, ERSS टीम की ओर से देर से प्रतिक्रिया देने या टीम के खिलाफ शिकायत मिलने पर ओसी को मामले की जांच करनी होगी।कुल मिलाकर, लालबाजार के इन निर्देशों का उद्देश्य ERSS व्यवस्था को पूरी तरह इमरजेंसी रिस्पॉन्स के लिए इस्तेमाल करना और 112 पर मिलने वाली सूचना के बाद पुलिस की प्रतिक्रिया को और तेज एवं प्रभावी बनाना है।