साहिबगंज - झारखंड के साहिबगंज में पकड़े गए बांग्लादेशी युवक सुमोन मियां को लंबी पूछताछ के बाद रविवार को मंडल कारा भेज दिया गया। जीआरपी पुलिस ने उसे दोपहर में अदालत के समक्ष पेश किया, जहां से उसे जेल भेजने का आदेश दिया गया। अब मामले में आगे की जांच के लिए रांची से एटीएस के अधिकारियों के आने की संभावना है।
मिली जानकारी के मुताबिक, एटीएस के अधिकारी सुमोन मियां से पूछताछ करने के लिए साहिबगंज पहुंचे थे, लेकिन उनके पहुंचने से पहले ही आरोपी को जेल भेजा जा चुका था। इसके बाद अधिकारियों ने जीआरपी थाने में थाना प्रभारी सत्यदेव राम से मुलाकात की और मामले से जुड़े दस्तावेज हासिल किए।
भारत में प्रवेश और एजेंटों की भूमिका की जांच
एटीएस इस मामले में कई पहलुओं की जांच करना चाहती है। जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि सुमोन मियां भारत में किस रास्ते से आया, सीमा पार कराने में किसी एजेंट की भूमिका थी या नहीं और उसके भारत आने का उद्देश्य क्या था।
इसके अलावा, श्रीनगर में उसके संपर्कों और कथित साथियों के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस के अनुसार, उसके पास से भारतीय मुद्रा के साथ पाकिस्तान और नेपाल की मुद्रा भी बरामद हुई थी। एजेंसी इन मुद्राओं के स्रोत और उनसे जुड़े संभावित संपर्कों की जानकारी हासिल करना चाहती है। रिपोर्ट के अनुसार, एटीएस के अधिकारी दस्तावेजों की जांच के बाद अदालत से अनुमति लेकर आरोपी से दोबारा पूछताछ कर सकते हैं। फिलहाल, जांच के निष्कर्ष सामने आने का इंतजार है।
ब्रह्मपुत्र मेल में चेन खिंचने के बाद पकड़ा गया था युवक
बताया गया है कि सुमोन मियां को 8 अगस्त को ब्रह्मपुत्र मेल में पकड़ा गया था। वह दिल्ली से असम की ओर जा रहा था और जनरल बोगी में सामान रखने के स्टैंड पर सोया हुआ था। इसी दौरान उसका हाथ ट्रेन की चेन तक पहुंच गया और चेन खिंचने से ट्रेन रुक गई।
ट्रेन रुकने के बाद रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के जवानों ने संबंधित बोगी में जांच शुरू की। इसी दौरान उसके साथ यात्रा कर रहे चार अन्य लोग कथित तौर पर वहां से भाग गए, जबकि सुमोन मियां को पकड़ लिया गया। जांच के दौरान उसके पास से बांग्लादेश का पहचान पत्र और भारत, पाकिस्तान तथा नेपाल की मुद्रा मिलने की बात सामने आई। इसके बाद केंद्रीय एजेंसियों ने भी उससे पूछताछ की थी।
श्रीनगर में तीन हजार से अधिक बांग्लादेशियों का दावा
रिपोर्ट के मुताबिक, पूछताछ के दौरान सुमोन मियां ने दावा किया कि श्रीनगर में तीन हजार से अधिक बांग्लादेशी नागरिक रहते हैं। उसके कथित बयान के अनुसार, इनमें कुछ लोग कबाड़ की दुकान चलाते हैं, जबकि अन्य कबाड़ चुनने और दूसरे कामों से जुड़े हैं।
उसने कथित तौर पर यह भी बताया कि एजेंटों के माध्यम से रोजगार की व्यवस्था की जाती है और सीमा पार करने के बाद ट्रेन से अलग-अलग स्थानों तक पहुंचना संभव होता है। हालांकि, श्रीनगर में बांग्लादेशी नागरिकों की संख्या, एजेंटों के नेटवर्क और सीमा पार कराने से जुड़े इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी जरूरी है। जांच एजेंसियां पूछताछ और दस्तावेजों के आधार पर तथ्यों का सत्यापन करेंगी।
आगे की जांच पर टिकी नजरें
सुमोन मियां को जेल भेजे जाने के बाद अब एटीएस की अगली कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। एजेंसी कथित संपर्कों, भारत में प्रवेश के तरीके और बरामद दस्तावेजों व मुद्राओं से जुड़े सवालों के जवाब तलाश सकती है। फिलहाल, मामले में सामने आए दावों और जांच के निष्कर्षों को अलग-अलग समझना जरूरी है। आगे की स्थिति आधिकारिक जांच और संबंधित एजेंसियों की जानकारी सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगी।