कोलकाता : पुलिस ने हाल ही में सीविक वालंटियर्स की कार्यप्रणाली, अनुशासन और उनकी भूमिका को लेकर एक सख्त मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी की है। 17 सितंबर को प्रकाशित इस नई आचार संहिता के तहत अब सीविक वालंटियर्स के लिए यह स्पष्ट कर दिया गया है कि उन्हें क्या करना है और क्या नहीं। हाल के दिनों में कुछ सीविक वालंटियर्स की संलिप्तता वाले आपराधिक मामलों और विवादों के सामने आने के बाद पुलिस प्रशासन ने यह कड़ा कदम उठाया है, ताकि व्यवस्था में पारदर्शिता और अनुशासन बनाए रखा जा सके।
कदाचार और लापरवाही पर सीधे बर्खास्तगी का प्रावधान
नई एसओपी के अनुसार, यदि कोई सीविक वालंटियर अपनी ड्यूटी में लापरवाही, अनुशासनहीनता, किसी आपराधिक मामले में संलिप्तता, बिना अनुमति के लंबे समय तक अनुपस्थिति, भ्रष्टाचार या जबरन वसूली (चंदा वसूलना) और जनता के साथ अभद्र व्यवहार जैसे मामलों में लिप्त पाया जाता है, तो उस पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। ऐसे मामलों में दोष साबित होने पर संबंधित वालंटियर को तुरंत सस्पेंड या स्थाई रूप से सेवा से बर्खास्त (डیموबीलाइज) किया जा सकता है। इसके अलावा, शारीरिक रूप से अक्षम होने या इलाज के कारण कर्तव्य निभाने में असमर्थ होने पर भी कोलकाता पुलिस के डिप्टी कमिश्नर (होमगार्ड ऑर्गनाइजेशन) द्वारा कार्रवाई की जा सकती है।
लंबी अनुपस्थिति पर नोटिस और कार्रवाई की प्रक्रिया
यदि कोई सीविक वालंटियर बिना किसी पूर्व अनुमति के लगातार सात दिनों तक ड्यूटी से अनुपस्थित रहता है, तो संबंधित थाने के प्रभारी अधिकारी (OC) को इसकी सूचना उच्च अधिकारियों को देनी होगी। नियमों के मुताबिक, ऐसे वालंटियर को सबसे पहले व्हाट्सएप के जरिए नोटिस भेजा जाएगा। इसके सात दिन बाद भी जवाब न मिलने पर उन्हें अंतिम नोटिस भेजकर कारण पूछा जाएगा। यदि दूसरा नोटिस मिलने पर भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है, तो उस वालंटियर को सेवा से स्थायी रूप से हटा दिया जा सकता है। हालांकि, गंभीर बीमारी या परिवार में किसी की मृत्यु जैसी विशेष परिस्थितियों में इन नियमों में नरमी बरतते हुए विचार किया जाएगा।
थानों के प्रभारियों को देना होगा तीन महीने पर रिपोर्ट
सीविक वालंटियर्स के कामकाज पर पैनी नजर रखने के लिए एक नियमित निगरानी प्रणाली भी बनाई गई है। प्रत्येक थाने के प्रभारी अधिकारियों को यह निर्देश दिया गया है कि वे अपने क्षेत्र के सीविक वालंटियर्स के प्रदर्शन और आचरण की समीक्षा करें। इसके बाद हर तीन महीने पर इसकी एक विस्तृत रिपोर्ट डिप्टी कमिश्नर और होमगार्ड ऑर्गनाइजेशन को अनिवार्य रूप से सौंपनी होगी, जिससे उनकी कार्यशैली पर उच्च स्तर पर नियंत्रण रखा जा सके।
हालिया विवादों और आपराधिक घटनाओं के बाद उठाया गया कदम
गौरतलब है कि बीते कुछ समय में सीविक वालंटियर्स की भूमिका को लेकर कई सवाल खड़े हुए हैं। साल 2024 में आरजी कर मेडिकल कॉलेज अस्पताल की घटना से लेकर हाल ही में झारखंड के एक व्यवसायी की हत्या जैसे मामलों में सीविक वालंटियर्स के नाम सामने आने के बाद से उनकी कार्यप्रणाली पर लगातार उंगलियां उठ रही थीं। इसके अलावा ट्रैफिक नियमों की अनदेखी और अवैध वसूली की शिकायतों के बीच पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी यह एसओपी बेहद अहम मानी जा रही है।