कोलकाता के स्थित भाजपा कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में राज्य अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद शमिक भट्टाचार्य ने प्रवासी बंगालियों के साथ मंच साझा किया। इस दौरान देश-विदेश से जुड़े बंगाली समुदाय के प्रतिनिधियों ने राज्य में परिवर्तन की जरूरत पर जोर दिया।
“बंगाल से जुड़ा है दिल, इसलिए बदलाव जरूरी”
अपने संबोधन में शमिक भट्टाचार्य ने कहा कि दुनिया भर में फैले बंगाली डायस्पोरा का बंगाल से भावनात्मक रिश्ता अटूट है। उन्होंने बताया कि ये लोग राज्य में निवेश, विकास और नई संभावनाओं को लेकर गंभीर हैं, लेकिन मौजूदा हालात उन्हें निराश कर रहे हैं।
“यह चुनाव निर्णायक मोड़”
ओवरसीज फ्रेंड्स ऑफ बीजेपी के सचिव युधाजीत सेन मजूमदार ने चुनाव को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह सिर्फ सत्ता परिवर्तन का चुनाव नहीं, बल्कि बंगाल के भविष्य का फैसला है। उन्होंने कहा कि दशकों से चली आ रही राजनीतिक स्थिति के कारण राज्य की हालत बिगड़ी है और अब यह एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है।
पहचान पर संकट की चेतावनी
युधाजीत सेन मजूमदार ने कहा कि अगर इस बार बदलाव नहीं हुआ, तो बंगाल अपनी पहचान खो सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि दुनिया भर में बसे बंगाली इस परिवर्तन की उम्मीद कर रहे हैं और राज्य को उसके “वास्तविक स्वरूप” में देखना चाहते हैं।
मोदी नेतृत्व का जिक्र, राज्य में भी अपेक्षा
प्रेस कॉन्फ्रेंस में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का जिक्र करते हुए कहा गया कि भारत की वैश्विक छवि मजबूत हुई है। वक्ताओं ने कहा कि जिस तरह केंद्र में विकास की गति बढ़ी है, वैसा ही परिवर्तन अब पश्चिम बंगाल में भी जरूरी है।
निवेश, AI और विकास की नई संभावनाएं
प्रवासी बंगालियों ने स्पष्ट किया कि वे राज्य में निवेश, व्यापार और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसे आधुनिक क्षेत्रों में काम करने के इच्छुक हैं। हालांकि, मौजूदा परिस्थितियों में भरोसे की कमी उनके रास्ते में बड़ी बाधा बनी हुई है। प्रेस कॉन्फ्रेंस का मुख्य संदेश साफ रहा—प्रवासी बंगाली अब सिर्फ दर्शक नहीं, बल्कि बदलाव के सक्रिय भागीदार बनना चाहते हैं। राज्य में राजनीतिक परिवर्तन की मांग अब और तेज होती नजर आ रही है।