कोलकाता: भारतीय रेलवे के स्टेशनों पर यात्रियों को मिलने वाली मूलभूत सुविधाओं और पेयजल की गुणवत्ता को लेकर सीएजी की रिपोर्ट ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। रिपोर्ट के अनुसार देशभर में निरीक्षण किए गए 512 गैर-उपनगरीय रेलवे स्टेशनों में से 458 स्टेशन न्यूनतम आवश्यक सुविधाओं के मानकों पर खरे नहीं उतरे। कई स्टेशनों पर बैठने की पर्याप्त व्यवस्था, शौचालय, मूत्रालय और पीने के पानी के नलों जैसी सुविधाओं की कमी पाई गई। इसके अलावा कुछ स्टेशनों पर पेयजल के नमूनों में ई-कोलाई समेत बैक्टीरिया की मौजूदगी सामने आई। सीएजी ने इसे यात्रियों की सुविधा और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिहाज से गंभीर विषय माना है।
संसद में पेश हुई सीएजी की रिपोर्ट
भारतीय रेलवे के गैर-उपनगरीय स्टेशनों पर यात्री सुविधाओं और स्वच्छता को लेकर सीएजी की रिपोर्ट संसद में पेश की गई है। रिपोर्ट में 2019-20 से 2023-24 तक की जांच और उपलब्ध आंकड़ों का विश्लेषण किया गया है। ऑडिट का मुख्य फोकस स्टेशनों पर यात्रियों के लिए उपलब्ध न्यूनतम सुविधाओं और स्वच्छता व्यवस्था पर रहा। जांच के दौरान कई स्टेशनों पर रेलवे बोर्ड की ओर से तय मानकों के अनुरूप सुविधाएं नहीं मिलीं। कुछ जगहों पर सुविधाएं पूरी तरह अनुपलब्ध थीं, जबकि कई स्थानों पर उपलब्ध सुविधाएं निर्धारित मानकों से कम थीं। रिपोर्ट में पेयजल की गुणवत्ता को विशेष महत्व दिया गया है। सीएजी ने रेलवे से व्यवस्था में सुधार और नियमित निगरानी की जरूरत बताई है।
512 में से 458 स्टेशनों पर मिलीं कमियां
सीएजी ने यात्री सुविधाओं की स्थिति जानने के लिए देशभर के 512 गैर-उपनगरीय रेलवे स्टेशनों का निरीक्षण किया। इनमें 458 स्टेशन यानी 89 प्रतिशत से अधिक स्टेशन न्यूनतम आवश्यक सुविधाओं के मामले में कमियों वाले पाए गए। रिपोर्ट के अनुसार कुछ स्टेशनों पर एक या अधिक जरूरी सुविधाएं उपलब्ध ही नहीं थीं। वहीं कुछ स्टेशनों पर सुविधाएं मौजूद होने के बावजूद वे रेलवे बोर्ड के निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं थीं। यात्रियों की बड़ी संख्या को देखते हुए इन कमियों को महत्वपूर्ण माना गया है। सीएजी के मुताबिक रेलवे स्टेशनों पर यात्री सुविधाओं का नियमित मूल्यांकन जरूरी है। खासकर बड़े और व्यस्त स्टेशनों पर सुविधाओं की उपलब्धता और गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
हावड़ा और सियालदह समेत बड़े स्टेशनों पर भी सवाल
रिपोर्ट में देश के कई महत्वपूर्ण एनएसजी-1 श्रेणी के स्टेशनों पर भी मूलभूत सुविधाओं की कमी का उल्लेख किया गया है। इनमें हावड़ा, सियालदह, नई दिल्ली, मुंबई सेंट्रल और छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस जैसे प्रमुख स्टेशन शामिल हैं। इन स्टेशनों पर पर्याप्त बैठने की व्यवस्था से लेकर शौचालय और मूत्रालय जैसी सुविधाओं में कमी का उल्लेख किया गया है। कुछ जगहों पर कूड़ेदान और इलेक्ट्रॉनिक ट्रेन संकेतक बोर्ड की उपलब्धता को लेकर भी कमियां सामने आईं। बड़े स्टेशनों पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में यात्री पहुंचते हैं। ऐसे में इन सुविधाओं की कमी यात्रियों के लिए परेशानी का कारण बन सकती है। सीएजी की रिपोर्ट ने इन स्टेशनों पर निर्धारित मानकों को प्रभावी ढंग से लागू करने की जरूरत रेखांकित की है।
2,035 स्टेशनों पर पीने के पानी के नलों की कमी
सीएजी की रिपोर्ट में पीने के पानी से जुड़ी सुविधाओं को लेकर भी कई कमियां सामने आई हैं। रिपोर्ट के अनुसार 2,035 स्टेशनों पर पीने के पानी के नलों की कमी पाई गई। इसके अलावा 201 स्टेशनों पर शौचालय और 403 स्टेशनों पर मूत्रालयों की कमी दर्ज की गई। आठ स्टेशनों पर पंखे और आठ स्टेशनों पर वाटर कूलर उपलब्ध नहीं थे। पांच स्टेशनों पर साइनबोर्ड की कमी भी सामने आई। यात्रियों के लिए गर्मी और भीड़भाड़ के दौरान पर्याप्त पेयजल सुविधा बेहद जरूरी होती है। ऐसे में नलों और वाटर कूलर की कमी यात्रियों की परेशानी बढ़ा सकती है। सीएजी ने रेलवे से न्यूनतम यात्री सुविधाओं को सुनिश्चित करने की जरूरत बताई है।
पेयजल में मिला ई-कोलाई बैक्टीरिया
रिपोर्ट का सबसे गंभीर पहलू कुछ स्टेशनों पर पेयजल के नमूनों में ई-कोलाई बैक्टीरिया की मौजूदगी से जुड़ा है। सीएजी के अनुसार छह रेलवे जोन में स्थित 59 केंद्रों पर पेयजल की जांच की गई थी। जांच के दौरान कई केंद्रों पर पानी में ई-कोलाई बैक्टीरिया पाया गया। दक्षिणी रेलवे के कोयंबटूर और पलक्कड़ जंक्शन के वाटर कूलरों के नमूनों में भी इसकी मौजूदगी दर्ज की गई। दक्षिण मध्य रेलवे के हैदराबाद स्टेशन पर भी ई-कोलाई पाया गया। सेंट्रल रेलवे के सीएसएमटी, भिवंडी रोड, कल्याण और लोनावला स्टेशनों से लिए गए वाटर कूलर के नमूनों में भी यह बैक्टीरिया मिला। पूर्वी रेलवे के मधुपुर स्टेशन के पानी में भी ई-कोलाई की मौजूदगी दर्ज की गई।
प्लेटफॉर्म के नलों के पानी में भी बैक्टीरिया
सीएजी की रिपोर्ट में प्लेटफॉर्म पर लगे नलों से लिए गए पेयजल के नमूनों को लेकर भी चिंता जताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार 2022-23 में आठ रेलवे जोन के 49 स्टेशनों से पानी के नमूने लिए गए थे। वहीं 2023-24 में नौ जोन के 56 स्टेशनों से प्लेटफॉर्म के नलों के पानी के नमूनों की जांच की गई। इन नमूनों में ई-कोलाई समेत कई तरह के बैक्टीरिया पाए गए। इससे रेलवे स्टेशनों पर पेयजल की नियमित गुणवत्ता जांच की जरूरत सामने आती है। यात्रियों को उपलब्ध कराया जाने वाला पानी निर्धारित स्वास्थ्य मानकों के अनुरूप होना जरूरी है। सीएजी ने पानी की आपूर्ति व्यवस्था की नियमित निगरानी और जांच की सिफारिश की है। रिपोर्ट में पेयजल की गुणवत्ता को यात्रियों की सुरक्षा से सीधे जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा माना गया है।
2018 में तय किए गए थे न्यूनतम सुविधाओं के मानक
रेलवे बोर्ड ने अप्रैल 2018 में रेलवे स्टेशनों के लिए न्यूनतम आवश्यक यात्री सुविधाओं के मानक निर्धारित किए थे। रेलवे को इन मानकों को 31 अगस्त 2018 तक लागू करने या सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया था। इन सुविधाओं में पेयजल, प्रतीक्षालय, बैठने की जगह, प्लेटफॉर्म कैनोपी और मूत्रालय शामिल हैं। इसके अलावा शौचालय, ऊंचा प्लेटफॉर्म, पंखे, फुट ओवरब्रिज और कूड़ेदान भी मानकों का हिस्सा हैं। स्टेशनों पर घड़ी और सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणाली जैसी सुविधाएं भी निर्धारित की गई थीं। इसके बावजूद सीएजी के निरीक्षण में बड़ी संख्या में स्टेशनों पर कमियां मिलीं। इससे मानकों के क्रियान्वयन और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठते हैं।
रोजाना 7,424 से अधिक गैर-उपनगरीय ट्रेनें
सीएजी ने रेलवे स्टेशनों पर यात्री सुविधाओं के महत्व को आंकड़ों के जरिए भी रेखांकित किया है। देश में कुल 5,908 गैर-उपनगरीय समूह स्टेशन बताए गए हैं। वर्ष 2023-24 में भारतीय रेलवे ने प्रतिदिन 7,424 से अधिक गैर-उपनगरीय यात्री ट्रेनें संचालित कीं। इसी अवधि में गैर-उपनगरीय यात्रियों की संख्या करीब 292.4 करोड़ रही। इतनी बड़ी संख्या में यात्रियों के लिए स्टेशन पर साफ-सफाई और मूलभूत सुविधाओं की पर्याप्त व्यवस्था जरूरी है। पेयजल, शौचालय और बैठने की सुविधा जैसी जरूरतें सीधे यात्रियों के दैनिक अनुभव से जुड़ी हैं। सीएजी ने यात्रियों की विशाल संख्या को देखते हुए बेहतर सेवा मानकों को बनाए रखने पर जोर दिया है।
सीएजी ने रेलवे को दिए सुधार के सुझाव
सीएजी ने रेलवे को पेयजल की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी है। रिपोर्ट में जल आपूर्ति प्रणालियों का नियमित निरीक्षण करने की सिफारिश की गई है। इसके साथ ही निर्धारित मानकों के अनुसार पेयजल की नियमित जांच सुनिश्चित करने को कहा गया है। स्टेशन पर उपलब्ध वाटर कूलर और पानी की आपूर्ति व्यवस्था की निगरानी भी जरूरी बताई गई है। रिपोर्ट का उद्देश्य केवल कमियों को सामने लाना नहीं, बल्कि यात्री सेवाओं में सुधार के लिए जरूरी कदमों की ओर ध्यान दिलाना भी है। यात्रियों की बड़ी संख्या को देखते हुए स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता महत्वपूर्ण है। रेलवे के लिए अब इन कमियों को दूर करना और निर्धारित मानकों के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करना बड़ी चुनौती है।