शांतिनिकेतन: बंगाल के सांस्कृतिक गौरव और विश्वकवि रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती, '25शे बैशाख' के अवसर पर आज शांतिनिकेतन स्थित विश्वभारती विश्वविद्यालय में उत्सव का माहौल रहा। हर साल की तरह इस बार भी गुरुदेव के जन्मदिन को पूरे मान-सम्मान और पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया गया।
भोर की प्रार्थना से शुरुआत
दिन की शुरुआत सुबह-सवेरे 'वैटालिक' (प्रभात फेरी) के मधुर भजनों और सुरों के साथ हुई। इसके बाद उपासना गृह (कांच मंदिर) में विशेष प्रार्थना सभा आयोजित की गई, जहाँ आश्रम के निवासियों और छात्रों ने कविगुरु को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्य सांस्कृतिक कार्यक्रम 'माधवी वितान' में आयोजित हुआ, जहाँ छोटे-छोटे बच्चों ने रवींद्र संगीत और कविता पाठ के जरिए एक जादुई वातावरण तैयार कर दिया।
विशेष आकर्षण: 'पंचवटी' का शताब्दी समारोह
इस वर्ष के उत्सव का सबसे विशेष आकर्षण रबींद्र भवन में स्थित 'पंचवटी' का नए कलेवर में उद्घाटन रहा। गौरतलब है कि आज से ठीक 100 साल पहले गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने अपने हाथों से यहाँ पाँच वृक्ष रोपे थे। इस ऐतिहासिक शताब्दी वर्ष के मौके पर उस स्थान को सजाया गया है और पर्यटकों के लिए पुन: खोल दिया गया है।
साधना का स्थल है शांतिनिकेतन
विश्वभारती के कुलपति ने इस दिन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा, "शांतिनिकेतन केवल एक शैक्षणिक संस्थान नहीं है, बल्कि यह एक साधना स्थल है।" उन्होंने संकल्प लिया कि विश्वविद्यालय की ऐतिहासिक विरासत को अक्षुण्ण रखते हुए दर्शनीय स्थलों को और भी सुंदर बनाया जाएगा ताकि आने वाली पीढ़ियाँ इस महान परंपरा से जुड़ी रहें।शांतिनिकेतन की लाल मिट्टी आज एक बार फिर रवींद्र-स्मृतियों में भीगकर एक अनूठे रूप में नजर आई।