शांतिकुंज की छत पर हाल ही में खिले बड़े-बड़े कमल के फूलों को देखकर मां गायत्री देवी ने पहले ही संकेत मिल जाने का दावा किया था। उनके अनुसार, उसी समय उन्हें यह आभास हो गया था कि राज्य में कमल का राजनीतिक प्रभाव बढ़ने वाला है। बाद में उन्होंने कहा कि राजनीतिक बदलाव के संकेत उन्हें पहले ही मिल चुके थे।
नंदीग्राम से भवानीपुर तक राजनीतिक चर्चा का जिक्र
गायत्री देवी ने बातचीत में कहा कि राजनीतिक घटनाक्रम के बाद बीजेपी की बढ़त और बड़े नेताओं की हार-जीत को उन्होंने पहले ही महसूस कर लिया था। उनके अनुसार, समय के साथ जो घटनाएं सामने आईं, उन्होंने उनके पुराने आभास को सही साबित किया।
स्कूल जीवन में बेहद शांत थे शुभेंदु अधिकारी
मां गायत्री देवी ने बताया कि शुभेंदु अधिकारी बचपन में काफी शांत स्वभाव के थे और माध्यमिक तक वे बहुत कम ही घर से बाहर निकलते थे। उन्होंने कहा कि उस समय वे ज्यादातर समय घर के बगीचे में बिताते थे और खेती-बाड़ी तथा पौधों के बीच रहते थे।
बचपन से ही बागवानी और साधारण जीवन पसंद
गायत्री देवी के अनुसार, शुभेंदु को बगीचे में काम करना पसंद था। वे शाबल और बाल्टी लेकर पौधों की देखभाल करते थे। घर के बगीचे में सब्जियों और पौधों की बड़ी विविधता थी, जिनमें वे रुचि लेते थे।
खानपान और पारिवारिक आदतों का खुलासा
उन्होंने बताया कि शुभेंदु को साधारण भोजन पसंद था, खासकर पांताभात। गर्मियों में वे अक्सर रात में चावल में पानी डालकर खाते थे, साथ में आलू भुजिया, मछली फ्राई या कभी-कभी अंडे का ऑमलेट भी लेते थे।
आध्यात्मिक रुचि और भक्ति भाव
गायत्री देवी ने आगे कहा कि शुभेंदु बचपन से ही धार्मिक प्रवृत्ति के रहे हैं। वे नियमित रूप से पूजा-पाठ में शामिल होते थे और विभिन्न धार्मिक स्थलों पर भी जाते थे। इसके अलावा वे स्वामी विवेकानंद के विचारों से काफी प्रभावित रहे हैं और धार्मिक महात्माओं के प्रति उनके मन में गहरा सम्मान रहा है।