कोलकाता: पश्चिम बंगाल में स्कूल छोड़ चुके बच्चों को दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। गुरुवार को विकास भवन में पश्चिम बंगाल समग्र शिक्षा मिशन (PBSSM) और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग (NIOS) के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता (MoU) हुआ। इस पहल का उद्देश्य ऐसे बच्चों और युवाओं तक शिक्षा पहुंचाना है जो किसी कारणवश नियमित स्कूल की पढ़ाई पूरी नहीं कर पाए।
प्रवासी बच्चों को भी मिलेगा फायदा
इस समझौते का सबसे बड़ा लाभ प्रवासी मजदूरों के बच्चों और उन विद्यार्थियों को मिलेगा, जिनकी पढ़ाई बार-बार स्थान बदलने के कारण प्रभावित होती है। अब NIOS में पंजीकृत छात्र यदि एक राज्य से दूसरे राज्य में भी चले जाएं, तो उनकी पढ़ाई नहीं रुकेगी। वे नए राज्य के अधिकृत केंद्र पर अपनी भाषा में पढ़ाई जारी रखने के साथ परीक्षा भी दे सकेंगे।
'कोई बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे'
राज्य के शिक्षा मंत्री दीपक बर्मन ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) और शिक्षा का अधिकार (RTE) कानून का मूल उद्देश्य हर बच्चे को शिक्षा से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि किसी भी परिस्थिति में कोई बच्चा स्कूल छोड़ने को मजबूर न हो और जो बच्चे पहले पढ़ाई छोड़ चुके हैं, उन्हें भी दूसरा अवसर मिले।
गांव-गांव तक पहुंचेगी सुविधा
शिक्षा मंत्री ने बताया कि इस योजना को केवल शहरों तक सीमित नहीं रखा जाएगा। सरकार चरणबद्ध तरीके से NIOS के स्टडी सेंटरों का विस्तार प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर तक करने की तैयारी कर रही है, ताकि दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले छात्र भी आसानी से इस सुविधा का लाभ उठा सकें।
पढ़ाई पूरी करने की नहीं होगी समय सीमा
नई व्यवस्था के तहत पहली से आठवीं कक्षा, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर तक पढ़ाई की सुविधा उपलब्ध होगी। नियमित स्कूलों की तरह एक तय समय में कोर्स पूरा करने की बाध्यता नहीं होगी। विद्यार्थी अपनी सुविधा और गति के अनुसार पढ़ाई पूरी कर सकेंगे तथा परीक्षा दे सकेंगे।
किसने किए समझौते पर हस्ताक्षर
समझौते पर NIOS की ओर से शाकिल अहमद और पश्चिम बंगाल समग्र शिक्षा मिशन की ओर से विभु गोयल ने हस्ताक्षर किए। राज्य सरकार का मानना है कि यह पहल स्कूल छोड़ चुके हजारों बच्चों और युवाओं को फिर से शिक्षा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।