पश्चिम बंगाल के चर्चित कोयला तस्करी मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मुख्य आरोपी अनूप माझी उर्फ ‘लाला’ को दिल्ली हाईकोर्ट से मिली अग्रिम जमानत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान सर्वोच्च अदालत ने मामले पर संज्ञान लेते हुए अनूप माझी को नोटिस जारी किया और जवाब दाखिल करने को कहा है। अब इस मामले की अगली सुनवाई सितंबर में होने की संभावना है।
₹2700 करोड़ से ज्यादा के अवैध कारोबार का आरोप
ईडी का आरोप है कि अनूप माझी अवैध कोयला खनन और तस्करी से जुड़े एक बड़े नेटवर्क का प्रमुख चेहरा है। जांच एजेंसी के अनुसार, यह पूरा मामला ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) के लीज क्षेत्रों से अवैध रूप से कोयला निकालने और उसकी सप्लाई से जुड़ा हुआ है। एजेंसी ने दावा किया कि इस अवैध कारोबार की रकम ₹2700 करोड़ से अधिक हो सकती है।
जांच में सहयोग नहीं करने का आरोप
सुनवाई के दौरान ईडी की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने अदालत को बताया कि अनूप माझी लंबे समय तक जांच से बचता रहा और पूछताछ में भी पूरा सहयोग नहीं किया। एजेंसी का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए हिरासत में पूछताछ जरूरी है।
बचाव पक्ष ने किया ED के दावों का विरोध
वहीं, अनूप माझी की ओर से पेश वकील ने अदालत में कहा कि उनके मुवक्किल ने जांच एजेंसियों के साथ सहयोग किया है और उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ करने की कोई आवश्यकता नहीं है। बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि अग्रिम जमानत कानून के दायरे में दी गई है।
बंगाल की राजनीति में भी गरमाया मुद्दा
कोयला तस्करी मामला लंबे समय से पश्चिम बंगाल की राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है। इस केस में कई बड़े नामों के सामने आने के बाद राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए हैं। अब सुप्रीम कोर्ट में ईडी की याचिका पर सुनवाई के बाद इस मामले पर देशभर की नजरें टिकी हुई हैं।