कोलकाता: पश्चिम बंगाल में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण को लेकर चल रही कानूनी विवाद एक बार फिर कलकत्ता हाई कोर्ट पहुँची। नई राज्य सरकार द्वारा जारी नई ओबीसी सूची को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने फिलहाल इस अधिसूचना पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। हालांकि,अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य में ओबीसी आरक्षण की अंतिम स्थिति क्या होगी, यह अभी तय नहीं है और इस पर न्यायिक प्रक्रिया जारी रहेगी।
क्या है पूरा मामला?
बुधवार को न्यायमूर्ति तापोब्रता चक्रवर्ती और न्यायमूर्ति राजशेखर मंथर की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई की। नई राज्य सरकार ने सत्ता में आने के बाद 74 समुदायों को सूची से बाहर रखते हुए नई ओबीसी सूची जारी की थी। इसी नई सूची को चुनौती देते हुए कलकत्ता हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई। याचिका में नई सूची की वैधता पर सवाल उठाए गए हैं। सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने फिलहाल अधिसूचना पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। हालांकि अदालत ने यह भी कहा कि राज्य में ओबीसी आरक्षण का भविष्य अभी स्पष्ट नहीं है। इस मामले की सुनवाई आगे भी जारी रहेगी और अंतिम फैसला बाद में आएगा।
याचिका में नई ओबीसी सूची की प्रक्रिया पर उठाए गए गंभीर सवाल
याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि नई ओबीसी सूची तैयार करने से पहले कोई सामाजिक सर्वेक्षण नहीं कराया गया। उनका यह भी कहना है कि राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की राय लिए बिना ही सूची तैयार कर दी गई। याचिका में सवाल उठाया गया है कि किन आधारों पर 74 समुदायों को ओबीसी सूची से बाहर किया गया और किन मानकों के आधार पर नई सूची बनाई गई। 18 मई को जारी अधिसूचना में इन 74 समुदायों को ओबीसी आरक्षण से बाहर करने की घोषणा की गई थी। इसी अधिसूचना को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई। याचिकाकर्ताओं ने पूरी प्रक्रिया की वैधता पर सवाल खड़े किए हैं।
ममता सरकार के समय बढ़ा था ओबीसी आरक्षण
तृणमूल कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में राज्य में ओबीसी आरक्षण को 7 प्रतिशत से बढ़ाकर 17 प्रतिशत कर दिया गया था। इस फैसले को लेकर कलकत्ता हाई कोर्ट से लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक कई कानूनी चुनौतियां सामने आई थीं। मामले की सुनवाई के दौरान कलकत्ता हाई कोर्ट ने वर्ष 2010 के बाद जारी सभी ओबीसी प्रमाणपत्रों को रद्द करने का आदेश दिया था। उस समय भारतीय जनता पार्टी ने आरोप लगाया था कि तत्कालीन तृणमूल सरकार ने वोट बैंक की राजनीति के लिए ओबीसी सूची का विस्तार किया। बाद में हाई कोर्ट के इस फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी गई थी। यह मामला लंबे समय से न्यायालय में विचाराधीन रहा है।
भाजपा सरकार ने वापस लिया मुकदमा
नई भाजपा सरकार ने हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय में लंबित संबंधित मुकदमा वापस ले लिया है। इसके बाद कलकत्ता हाई कोर्ट का पूर्व फैसला प्रभावी बना हुआ है। इसी क्रम में राज्य में ओबीसी आरक्षण को 17 प्रतिशत से घटाकर फिर 7 प्रतिशत कर दिया गया। ममता बनर्जी सरकार के समय लागू की गई ओबीसी आरक्षण व्यवस्था अब समाप्त हो चुकी है। वर्तमान व्यवस्था के अनुसार 66 समुदाय ही ओबीसी आरक्षण के दायरे में शामिल हैं। नई सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के बाद आरक्षण की व्यवस्था में यह बदलाव लागू किया गया है।
फिलहाल क्या स्थिति है?
कलकत्ता हाई कोर्ट ने नई ओबीसी सूची पर तत्काल रोक लगाने से इनकार कर दिया है। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि इस समय अधिसूचना प्रभावी रहेगी और मामले की सुनवाई जारी रहेगी। साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल में ओबीसी आरक्षण का भविष्य क्या होगा, इस पर अंतिम स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। इस मामले में आगे की सुनवाई के बाद ही कोई अंतिम निर्णय सामने आएगा। फिलहाल नई ओबीसी सूची को लेकर कानूनी प्रक्रिया जारी है और अदालत के अंतिम फैसले का इंतजार किया जाएगा।