कोलकाता: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों के बाद सत्ता परिवर्तन के साथ ही प्रशासनिक ढांचे में बड़े बदलाव की शुरुआत हो गई है। भारतीय जनता पार्टी की जीत के बाद राज्य में ‘सिस्टम क्लीन-अप’ अभियान तेज हो गया है।
शपथ से पहले ही ‘सिस्टम की सफाई’ शुरू
मुख्य सचिव के स्तर से जारी निर्देशों के बाद राज्य के कई अहम सरकारी दफ्तरों में कार्रवाई तेज हो गई है। पूर्व सरकार के दौरान नियुक्त रिटायर्ड नौकरशाहों को तत्काल प्रभाव से दफ्तरों में प्रवेश से रोक दिया गया है। कई कार्यालयों को सील कर दिया गया और नेमप्लेट तक हटा दी गई।
क्यों लगाया गया यह प्रतिबंध?
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, यह कदम किसी भी संभावित फाइल मूवमेंट या संवेदनशील डेटा में छेड़छाड़ को रोकने के लिए उठाया गया है। पूर्व शासन में कई रिटायर्ड IAS और IPS अधिकारियों को सलाहकार या एक्सटेंशन के जरिए महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई थीं।
नबन्ना समेत प्रमुख दफ्तरों में सख्ती
राज्य सचिवालय नबन्ना और अन्य प्रमुख सरकारी संस्थानों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। कई पूर्व सलाहकार जब अपने दफ्तर पहुंचे, तो उन्हें बाहर ही रोक दिया गया। सुरक्षाकर्मियों को साफ निर्देश दिए गए हैं कि बिना अनुमति किसी को भी अंदर न जाने दिया जाए।
समानांतर प्रशासन’ पर लगेगा ब्रेक?
नई सरकार के नेताओं का दावा है कि पहले एक समानांतर प्रशासन चल रहा था, जिसमें रिटायर्ड अफसरों की बड़ी भूमिका थी। अब इन सभी नियुक्तियों की समीक्षा की जाएगी और नियमों के तहत ही आगे की कार्रवाई तय होगी।
जवाबदेही तय, युवाओं को मिलेगा मौका
सरकार के सूत्रों का कहना है कि संदिग्ध फैसलों की जांच भी हो सकती है। साथ ही प्रशासनिक ढांचे में पारदर्शिता लाने के लिए युवा और ईमानदार अधिकारियों को अहम जिम्मेदारियां दी जाएंगी।
नबन्ना में सन्नाटा, अफसरों में हलचल
इस अचानक फैसले के बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। लंबे समय से प्रभावशाली रहे कई पूर्व अधिकारी अब इस बदलाव से सीधे प्रभावित हुए हैं।