सिलीगुड़ी: पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद पिछले शासनकाल के काले कारनामे एक-एक कर सामने आने लगे हैं। आरजी कर अस्पताल से शुरू हुआ ‘थ्रेट कल्चर’ (धमकाने की संस्कृति) का जिन्न अब राज्य के पर्यटन विभाग (Tourism Department) से भी बाहर निकल आया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के शासनकाल में पर्यटन विभाग में चल रहे भ्रष्टाचार और सिंडिकेट राज के खिलाफ आवाज उठाने वाली एक स्थाई महिला कर्मचारी को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा था। अब राज्य में व्यवस्था बदलते ही पीड़िता ने नए पर्यटन मंत्री शंकर घोष से मुलाकात कर न्याय की गुहार लगाई है।
यह पूरा मामला सिलीगुड़ी में आयोजित सीधे शंकर जनसुनवाई कार्यक्रम के दौरान सामने आया, जहां पर्यटन मंत्री ने पीड़िता की पूरी बात सुनने के बाद इस मामले में कड़ी विभागीय जांच (Departmental Inquiry) के आदेश दे दिए हैं।
क्या है पूरा मामला? क्यों गई अर्पिता की नौकरी?
शिकायत लेकर पहुंचीं युवती का नाम अर्पिता दास है, जो जलदापाड़ा की रहने वाली हैं अनुकंपा पर मिली थी नौकरी: अर्पिता के पिता अरुण दास के निधन के बाद उन्हें अनुकंपा के आधार पर पर्यटन विभाग में स्थाई नौकरी मिली थी। साल 2020 में उन्होंने काम संभाला था।
सिंडिकेट राज के खिलाफ उठाई आवाज: अर्पिता की पहली पोस्टिंग मालबाजार में हुई थी, जिसके बाद उनका तबादला जलदापाड़ा कर दिया गया। नौकरी के दौरान उन्होंने विभाग के भीतर फैले 'थ्रेट कल्चर' और अवैध सिंडिकेट राज को करीब से देखा और इसके खिलाफ आवाज उठानी शुरू कर दी।
शिकायत करने पर मिली सजा: अर्पिता ने इस भ्रष्टाचार की शिकायत तत्कालीन टीएमसी के पर्यटन मंत्री से भी की थी। लेकिन भ्रष्टाचारियों पर कार्रवाई करने के बजाय, उल्टा अर्पिता को प्रताड़ित करने के लिए उनका तबादला सीधे कोलकाता कर दिया गया।
बिना बताए बंद कर दी सैलरी:अर्पिता ने मानसिक उत्पीड़न और परिस्थितियों का हवाला देते हुए कोलकाता जाने में असमर्थता जताई और विभाग को पत्र लिखकर सूचित किया। इसके बाद विभाग ने उनके पत्र का कोई जवाब नहीं दिया और बिना किसी आधिकारिक नोटिस के उनकी सैलरी (वेतन) पूरी तरह बंद कर दी, जिसके कारण उन्हें नौकरी छोड़नी पड़ी।
'मुझे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया' – पीड़िता
रविवार को सिलीगुड़ी हिंदी हाई स्कूल में आयोजित 'सीधे शंकर' कार्यक्रम में मंत्री के सामने अपना दुखड़ा रोते हुए अर्पिता दास ने कहा, "मैंने जब विभाग के भ्रष्टाचार को पकड़ लिया, तो मुझे अलग-थलग कर दिया गया। मुझ पर भारी मानसिक अत्याचार किया गया और दबाव बनाने के लिए कोलकाता ट्रांसफर कर दिया गया। मेरी सैलरी क्यों बंद की गई, आज तक मुझे नहीं बताया गया। जो लोग मुझे डराते-धमकाते थे, आज मैंने उन सबके नाम नए मंत्री जी को सौंप दिए हैं।"
पर्यटन मंत्री शंकर घोष की दोटूक: 'दोषियों को ऐसी सजा मिलेगी जो मिसाल बनेगी'
इस संवेदनशील मामले को सुनने के बाद पश्चिम बंगाल के नए पर्यटन मंत्री शंकर घोष ने कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
पर्यटन मंत्री ने मीडिया से बात करते हुए कहा, "मुझे लिखित शिकायत मिली है और मामले की गहराई से जांच की जाएगी। टीएमसी शासन के दौरान जिन लोगों ने भी इस थ्रेट कल्चर और सिंडिकेट राज को बढ़ावा दिया है, उन्हें किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। इस पूरे मामले की विभागीय जांच होगी और दोषियों को ऐसी सजा दी जाएगी ताकि भविष्य में कोई ऐसा दुस्साहस न कर सके।"
गौरतलब है कि 'सीधे शंकर' कार्यक्रम में केवल पर्यटन विभाग ही नहीं, बल्कि जमीन कब्जाने (लैंड ग्रैबिंग) समेत सिंडिकेट राज से जुड़ी कई अन्य शिकायतें भी स्थानीय नागरिकों द्वारा दर्ज कराई गईं, जिन पर नए मंत्री ने त्वरित कार्रवाई का भरोसा दिया है।