एशियाई विकास बैंक (ADB) ने अपनी एशियाई विकास परिदृश्य (ADO) जुलाई 2026 रिपोर्ट में भारत की वित्त वर्ष 2026-27 की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि दर का अनुमान 6.9 प्रतिशत से घटाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण ऊर्जा कीमतों में संभावित बढ़ोतरी से घरेलू आय और आर्थिक गतिविधियों पर दबाव बढ़ सकता है। यही कारण है कि विकास दर के अनुमान में संशोधन किया गया है।
2027-28 के लिए सकारात्मक तस्वीर बरकरार
हालांकि चालू वित्त वर्ष के अनुमान में कमी की गई है, लेकिन वित्त वर्ष 2027-28 के लिए ADB ने भारत की विकास दर का अनुमान 7.3 प्रतिशत पर यथावत रखा है। बैंक का मानना है कि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों में संभावित सुधार, विभिन्न देशों के साथ व्यापार समझौते और निर्यात प्रतिस्पर्धा में वृद्धि भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूती देंगे। इससे मध्यम अवधि में विकास की गति फिर तेज हो सकती है।
सरकार की नीतियां देंगी अर्थव्यवस्था को सहारा
रिपोर्ट में कहा गया है कि अधिक विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए किए जा रहे नीतिगत सुधार, ईंधन पर करों में संभावित राहत, लक्षित ऋण सहायता, सेवा क्षेत्र के निर्यात में मजबूती और सार्वजनिक पूंजीगत व्यय में निरंतर वृद्धि भारतीय अर्थव्यवस्था को समर्थन प्रदान करेंगे। इन उपायों से वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद विकास की रफ्तार बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद जताई गई है।
महंगाई और कृषि क्षेत्र को लेकर बनी हुई है चिंता
ADB ने अपनी रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी है कि बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और मौसम संबंधी जोखिम कृषि क्षेत्र को प्रभावित कर सकते हैं। इसी वजह से बैंक ने 2026-27 के लिए मुद्रास्फीति का अनुमान 4.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.2 प्रतिशत कर दिया है। हालांकि 2027-28 के लिए महंगाई का अनुमान 4 प्रतिशत पर ही कायम रखा गया है, जिससे संकेत मिलता है कि लंबी अवधि में मूल्य स्थिरता की उम्मीद बनी हुई है।
RBI और IMF के अनुमान भी दिखा रहे समान रुझान
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भी हाल ही में 2026-27 के लिए जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान 6.9 प्रतिशत से घटाकर 6.6 प्रतिशत किया था, जबकि मुद्रास्फीति का अनुमान 4.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत कर दिया। वहीं अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भारत की 2026-27 की विकास दर 6.4 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है, जबकि 2027-28 के लिए इसे बढ़ाकर 6.7 प्रतिशत किया गया है। इन अनुमानों से स्पष्ट है कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था अन्य प्रमुख देशों की तुलना में मजबूत स्थिति में बनी हुई है।