मुंबई. भारत तेजी से वैश्विक पूंजी निवेश का प्रमुख केंद्र बनकर उभर रहा है। देश के पूंजी बाजार की मजबूती और स्थिरता ने अंतरराष्ट्रीय निवेशकों का भरोसा जीत लिया है। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड के अध्यक्ष तुहिन कांत पांडेय ने हाल ही में इस बात पर जोर दिया कि भारत का बाजार पूंजीकरण अब लगभग 4.4 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है, जो इसे वैश्विक स्तर पर एक महत्वपूर्ण निवेश गंतव्य बनाता है।
वैश्विक मंच पर बढ़ती भारत की साख
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड के प्रमुख ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर कहा कि भारत अब केवल उभरता हुआ बाजार नहीं रह गया है, बल्कि एक स्वतंत्र और मजबूत निवेश केंद्र के रूप में स्थापित हो रहा है। वैश्विक आर्थिक अस्थिरता के बावजूद भारतीय बाजारों ने उल्लेखनीय लचीलापन दिखाया है।
पूंजी जुटाने में भारत की बड़ी छलांग
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने इक्विटी और ऋण बाजारों के माध्यम से लगभग 154 अरब डॉलर की पूंजी जुटाई है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि भारतीय वित्तीय प्रणाली अब बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित करने में सक्षम हो चुकी है। वर्ष 2025 में भारत ने आईपीओ की संख्या के मामले में विश्व में पहला स्थान प्राप्त किया, जबकि जुटाई गई पूंजी के मामले में तीसरे स्थान पर रहा।
म्यूचुअल फंड और एआईएफ में तेजी
देश में म्यूचुअल फंड की परिसंपत्तियां लगभग 900 अरब डॉलर के करीब पहुंच चुकी हैं, जो निवेशकों के बढ़ते विश्वास का संकेत है। इसके अलावा वैकल्पिक निवेश कोष में निवेश प्रतिबद्धताएं 175 अरब डॉलर से अधिक हो चुकी हैं, जो पूंजी बाजार के विस्तार को दर्शाती हैं।
आर्थिक विकास में पूंजी बाजार की भूमिका
भारत की अर्थव्यवस्था को गति देने में पूंजी बाजार की भूमिका लगातार बढ़ रही है। चालू वित्त वर्ष के लिए सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर 7.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है। यह दर्शाता है कि वित्तीय प्रणाली और बाजार मिलकर आर्थिक विकास को मजबूत आधार प्रदान कर रहे हैं।
विदेशी निवेशकों का बढ़ता भरोसा
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की परिसंपत्तियां लगभग 780 अरब डॉलर तक पहुंच गई हैं, जो सूचीबद्ध इक्विटी का करीब 17 प्रतिशत हिस्सा है। इससे स्पष्ट होता है कि विदेशी निवेशक भारतीय बाजारों को स्थिर और लाभदायक मान रहे हैं।
कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार का विस्तार
भारत का कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार भी तेजी से विस्तार कर रहा है और यह लगभग 650 अरब डॉलर के करीब पहुंच चुका है। यह क्षेत्र बुनियादी ढांचे और अन्य विकास परियोजनाओं के लिए महत्वपूर्ण वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराता है, जिससे देश की आर्थिक प्रगति को बल मिलता है।
निवेश गंतव्य के रूप में नई पहचान
भारत अब वैश्विक निवेश मानचित्र पर एक मजबूत और भरोसेमंद गंतव्य के रूप में उभर चुका है। तकनीक, स्वास्थ्य सेवा और ऊर्जा जैसे विविध क्षेत्रों में निवेश के अवसरों ने इसे और अधिक आकर्षक बना दिया है। यह परिवर्तन देश की मजबूत संस्थागत संरचना और आर्थिक नीतियों का परिणाम है।