नई दिल्ली. भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर एक अच्छी खबर सामने आई है। विश्व बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की आर्थिक विकास दर का अनुमान 6.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.1 प्रतिशत कर दिया है। बैंक के मुताबिक महंगाई और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों जैसी चुनौतियों के बावजूद मजबूत घरेलू मांग ने अर्थव्यवस्था को मजबूती दी है। विश्व बैंक ने दक्षिण एशिया की 2026 की ग्रोथ का अनुमान भी बढ़ाकर 6.9 प्रतिशत कर दिया है। यह उसके पिछले अनुमान से 60 बेसिस पॉइंट अधिक है। भारत की अर्थव्यवस्था ने हाल के महीनों में उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया है। अप्रैल-जून तिमाही में देश की GDP ग्रोथ 7.8 प्रतिशत रही थी।
घरेलू खपत बनी प्रमुख ताकत
विश्व बैंक के मुताबिक कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के बावजूद दक्षिण एशिया में घरेलू खपत पर बड़ा असर नहीं पड़ा है। सरकार की ओर से उपभोक्ताओं को राहत देने वाले कदम मजबूत रेमिटेंस और घरेलू मांग ने अर्थव्यवस्था को बाहरी झटकों से निपटने में मदद की है। विश्व बैंक की चीफ एशिया इकनॉमिस्ट फ्रांसिस्का ऑनसोर्ग के मुताबिक ईरान युद्ध के कारण सप्लाई में आई रुकावटों का दक्षिण एशियाई अर्थव्यवस्थाओं पर अब तक सीमित असर रहा है। भारत के मामले में मजबूत कंजम्पशन खास तौर पर महत्वपूर्ण है क्योंकि ऊंची महंगाई ने पहले ही लोगों की खरीदारी क्षमता पर दबाव डाला है। इसके बावजूद घरेलू मांग में मजबूती बनी हुई है।
चुनौतियां और जोखिम
विश्व बैंक ने हालांकि आर्थिक आउटलुक को लेकर कुछ जोखिम भी गिनाए हैं। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें अल नीनो का खतरा और वैश्विक वित्तीय बाजारों में संभावित गिरावट भारत समेत दक्षिण एशिया की ग्रोथ पर दबाव डाल सकते हैं। बैंक का अनुमान है कि महंगाई 2027 तक ऊंचे स्तर पर बनी रह सकती है। हालांकि महंगाई का आर्थिक गतिविधियों पर पूरा असर दिखाई देने में कुछ समय लग सकता है। इन चुनौतियों के बावजूद घरेलू मांग की मजबूती अर्थव्यवस्था को सहारा दे रही है। बाहरी झटकों से निपटने की क्षमता बढ़ी है।
दक्षिण एशिया का बेहतर परिदृश्य
दक्षिण एशिया की ग्रोथ अनुमान में 60 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी क्षेत्रीय अर्थव्यवस्थाओं के लचीलेपन को दर्शाती है। भारत की मजबूत घरेलू मांग पूरे क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत है। रेमिटेंस और सरकारी राहत उपायों ने उपभोक्ता खर्च को बनाए रखा है। विश्व बैंक का संशोधित अनुमान वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती को रेखांकित करता है। अप्रैल-जून तिमाही का 7.8 प्रतिशत ग्रोथ आंकड़ा भी इसी दिशा में है।
आगे की संभावनाएं
विश्व बैंक के अनुमान से भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर सकारात्मक माहौल बना है। घरेलू खपत की मजबूती और सरकारी नीतियों का समर्थन विकास को गति दे रहा है। महंगाई और तेल कीमतों जैसी चुनौतियों पर नजर रखते हुए नीति निर्माता कदम उठा रहे हैं। वित्त वर्ष 2026-27 में 7.1 प्रतिशत ग्रोथ का लक्ष्य हासिल करना संभव दिख रहा है। वैश्विक जोखिमों के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था लचीली बनी हुई है। विश्व बैंक का यह संशोधन निवेशकों और नीति निर्माताओं दोनों के लिए उत्साहजनक है।