आखिरकार 16 साल बाद रायपुर दक्षिण विधानसभा सीट की राह खुली है। इससे पहले 2008 में अस्तित्व में आने के बाद से ही लगातार यहां से सांसद बन चुके बृजमोहन अग्रवाल को टिकट दिया जाता रहा और वे लगातार यहां से जीत हासिल करते रहे। सांसद बनने के बाद उन्होंने अपने विधायक पद से इस्तीफा दे दिया है। ऐसे में अब भाजपा में इस सीट से दावेदारों की होड़ सी लग गई है। अब तक तकरीबन एक दर्जन से ज्यादा भाजपा के वरिष्ठ नेता, पार्षद सहित छात्र संगठन के युवा नेता अपनी-अपनी दावेदारी ठोक रहे हैं।
आखिरकार 16 साल बाद रायपुर दक्षिण विधानसभा सीट की राह खुली है। इससे पहले 2008 में अस्तित्व में आने के बाद से ही लगातार यहां से सांसद बन चुके बृजमोहन अग्रवाल को टिकट दिया जाता रहा और वे लगातार यहां से जीत हासिल करते रहे। सांसद बनने के बाद उन्होंने अपने विधायक पद से इस्तीफा दे दिया है। ऐसे में अब भाजपा में इस सीट से दावेदारों की होड़ सी लग गई है। अब तक तकरीबन एक दर्जन से ज्यादा भाजपा के वरिष्ठ नेता, पार्षद सहित छात्र संगठन के युवा नेता अपनी-अपनी दावेदारी ठोक रहे हैं।
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