प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट भिक्षावृत्ति मुक्त भारत को अमलीजामा पहनाने के लिए भोपाल जिला प्रशासन ने राजधानी भोपाल को भिक्षावृत्ति बनाने के लिए कमर कस ली है और इंदौर की तर्ज भोपाल को भी भिखारी मुक्त बनाने के लिए एक टीम गठित की है, जो भोपाल में मौजूद भिखारियों की प्रोफाइल तैयार करेगी।
मैदान पर सर्वे किया गया
इसके लिए मंगलवार से मैदान पर सर्वे किया गया। इसमें बच्चों से लेकर महिलाओं और पुरुषों तक सभी की एक-एक प्रोफाइल बनाई जा रही है। जिसे उन्हें चिन्हित किया जा सके। खास बात यह है कि सर्वे के दौरान अधिकांश भिखारी गांधी नगर की एक ही बस्ती के मिले।
लोगों के पुनर्वास पर काम किया जाएगा
बता दें कि इसमें एसडीएम, तहसीलदार और सामाजिक न्याय विभाग मिलकर सर्वे कर रहे हैं। सर्वे के बाद इन लोगों के पुनर्वास पर काम किया जाएगा। भीख मांगने वाले व्यक्तियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए सर्वेक्षण, पहचान, मोबिलाइजेशन, पुनर्वास और आजीविका के उपाय किए जाएंगे।
200 से ज्यादा लोग भीख मांगते मिले
सर्वे के दौरान पहले ही दिन चौराहों, तिराहों से लेकर धार्मिक स्थलों, रेलवे स्टेशन और बस स्टेशन समेत अन्य जगहों पर 200 से ज्यादा लोग भीख मांगते मिले। एमपीनगर, गोविंदपुरा, कोलार, सिटी, बैरागढ़ तहसील के तहसीलदार को सर्वे की जिम्मेदारी दी गई है।
इंदौर में भिखारियों की सीसीटीवी से मॉनिटरिंग की जा रही है
इंदौर जिला प्रशासन के फरमान को अमलीजामा पहनाने के लिए इंदौर में भिक्षुक मुक्त अभियान को सफल बनाने के लिए इंदौर के अलग-अलग चौराहों पर लगे सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से मॉनिटरिंग की जा रही है और किन-किन गाड़ियों से लोगों ने भिक्षुकों को भीख दी है, उनकी पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
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