पांच साल की बच्ची से ज्यादती के बाद हत्या करने वाले आरोपी को दोपहर पुलिस ने कोर्ट में पेश किया। पुलिस ने घटना का रीक्रिएशन करने, आरोपी से पूछताछ करने और वारदात में उपयोग में लाई गई अन्य सामग्री को जब्त करने के लिए आरोपी को तीन दिन की रिमांड पर लिया है।
साक्ष्य छिपाने के आरोप में गिरफ्तार मां और बहन को जेल भेज दिया गया। पुलिस पूछताछ के बाद 30 सितंबर को आरोपी को कोर्ट में पेश करेगी। पुलिस ने आरोपी के फ्लैट की एक बार फिर सर्चिंग की है। जहां से घटना के समय उसके द्वारा पहना हुआ लोअर सहित अंडर गार्मेंट्स और एक शर्ट जब्त किया है।
पुलिस यह भी जानने की कोशिश कर रही है कि घटना के बाद वे कौन लोग थे जिनको मामले की जानकारी थी पर उन्होंने बताया नहीं। घटना के बाद पुलिस की बढ़ती सख्ती को देखते हुए आरोपी भागने की फिराक में था, लेकिन पुलिस ने उसे रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार कर लिया। मामले को लेकर भोपाल गेट पर लोगों ने प्रदर्शन किया।
पीएम रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे
पांच साल की मासूम के साथ दुष्कर्म और हत्या करने के मामले में शार्ट पीएम रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। रिपोर्ट में पता चला कि बच्ची की मौत खून बहने और डर से आए शॉक लगने की वजह से हुई है। जब आरोपी अतुल बच्ची के साथ दुष्कर्म कर रहा था, तब वह बिलख-बिलख कर रो रही थी। इसके बाद आरोपी ने उसका गला घोट दिया, जिससे वह बेहोश हो गई। इसके बाद भी आरोपी नहीं रुका और लगातार 20 मिनट तक बच्ची के शरीर को नोचता रहा। इस दौरान लगातार बच्ची के शरीर से खून बह रहा था। इसके बाद आरोपी ने बच्ची को कपड़े में लपेट कर टंकी में छिपा दिया।संवेदना खत्म हो रही बढ़ रही दरिंदगी
बीते दिनों बच्चियों के साथ हुई घटनाएं अपने पीछे कई सवाल छोड़ गई हैं। इनमें से एक ऐसे कृत्य करने वाले लोगों की मानसिकता से जुड़ा है। इस पर मनोचिकित्सकों का मानना है कि संवेदना खत्म होने से दरिंदगी बढ़ रही है। इसके लिए चाइल्ड पोर्नोग्राफी भी जिम्मेदार है। जो एक घातक विकृति का कारण बन रही है। बच्चों और बच्चियों के साथ इस तरह के अपराध करने वाले व्यक्ति की मानसिकता विकृत होती है।यह लक्षण दिखें तो हो जाएं सावधान
शक्ति और नियंत्रण की भावना: ऐसे लोग बच्चों को अपनी शक्ति और नियंत्रण का विषय बनाते हैं।
यौन इच्छाओं की विकृति: उनकी यौन इच्छाएं असामान्य होती हैं।
बच्चों के प्रति उदासीनता: वे बच्चों की भावनाओं दर्द को नहीं समझते हैं।
आत्म-मुग्धता: वे अपने कार्यों को सही मानते हैं और अपनी आत्म-मुग्धता को बढ़ावा देते हैं।
सामाजिक अलगाव: वे समाज से अलग-थलग होते हैं और अपने कार्यों को छिपाने के लिए प्रयास करते हैं।
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