मध्य प्रदेश में बाघों के संरक्षण के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है। सोमवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार ने रातापानी वन्यजीव अभ्यारण्य को आधिकारिक तौर पर टाइगर रिजर्व घोषित कर दिया। यह राज्य का आठवां टाइगर रिजर्व है, जहां लगभग 90 बाघ रहते हैं। यह फैसला मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में चल रही एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान आया है। यह PIL वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने दायर की थी। इसमें केंद्र सरकार और NTCA से मंज़ूरी मिलने के बावजूद रिजर्व की अधिसूचना में देरी को चुनौती दी गई थी।
लंबे समय से पेंडिंग था मामला
यह फैसला काफी समय से लंबित था। 2008 में NTCA से सैद्धांतिक मंजूरी मिलने के बाद भी राज्य सरकार ने टाइगर रिजर्व बनाने में देरी की थी। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से राज्य सरकार को अधिसूचना प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश देने का आग्रह किया था। उन्होंने इंसानों और जानवरों के बीच बढ़ते संघर्ष और बाघों की आबादी की रक्षा की जरूरत का हवाला दिया था।
देरी की वजह से बढ़ रहे थे बाघ और इंसानों के संघर्ष
PIL में याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि रातापानी टाइगर रिजर्व को अंतिम रूप देने में देरी के कारण बाघ-मानव संघर्ष में वृद्धि हुई है। बाघ भोजन की तलाश में आबादी वाले इलाकों में भटक रहे हैं। अतिक्रमण और आवास क्षरण के कारण अभ्यारण्य के भीतर पर्याप्त शिकार की कमी ने इस स्थिति को और बदतर बना दिया है।
रायसेन और सीहोर जिले में है स्थित
रातपानी वन्यजीव अभ्यारण्य रायसेन और सीहोर जिलों में स्थित है। यह मध्य प्रदेश में बाघों के एक महत्वपूर्ण आवास का हिस्सा है। हाल के वर्षों में, सतपुड़ा पर्वत श्रृंखला से बाघ इस अभ्यारण्य और आसपास के वन क्षेत्रों में आने लगे हैं। बाघों के इन इलाकों में आने के बाद, 2007 में राज्य सरकार ने रतपानी और सिंघोरी अभ्यारण्यों को टाइगर रिजर्व घोषित करने की प्रक्रिया शुरू की थी।
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