केंद्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान, बेंगलुरु ने जैव रसायन और रुधिरविज्ञान के क्षेत्र में ISO 15189:2022 मान्यता प्राप्त कर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। इसके साथ ही यह केंद्रीय आयुर्वेदीय विज्ञान अनुसंधान परिषद का पहला संस्थान बन गया है, जिसे यह अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिली है।
एनएबीएल से 50 मापदंडों पर मान्यता
संस्थान को राष्ट्रीय परीक्षण और अंशशोधन प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड से 50 मापदंडों पर मान्यता प्राप्त है। यहां हर साल 1.5 लाख से अधिक परीक्षण किए जाते हैं। एनएबीएल प्रमाणन के बाद संस्थान ने ISO 15189:2022 के सख्त मानकों को भी पूरा किया है।
आयुष क्षेत्र को मिलेगा लाभ
केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव ने इसे आयुष क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि यह मान्यता सटीक और विश्वसनीय जांच सुनिश्चित करती है, जिससे आयुष आधारित स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा।
अनुसंधान को मिलेगी मजबूती
आयुष सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने कहा कि यह उपलब्धि प्रमाण-आधारित चिकित्सा और अनुसंधान को और मजबूत करेगी, जिससे आयुर्वेदिक उपचारों की विश्वसनीयता बढ़ेगी।
उच्च गुणवत्ता सेवाओं पर जोर
केंद्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान न केवल उन्नत जांच सेवाएं प्रदान करता है, बल्कि आयुर्वेद और आयुष आधारित उपचारों के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इससे रोगियों की देखभाल और अनुसंधान परिणामों में सुधार हो रहा है।
पहले भी मिल चुकी उपलब्धियां
संस्थान 2021-22 में एनएबीएच और एनएबीएल दोनों प्रारंभिक प्रमाणपत्र प्राप्त करने वाला पहला सीसीआरएएस संस्थान बन चुका है। इसके अलावा, यह BIS ISO 9001:2015 प्रमाणन की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है।
भविष्य की योजनाएं
संस्थान भविष्य में परीक्षणों की संख्या बढ़ाने और अपनी जांच क्षमता को और सशक्त बनाने की योजना पर काम कर रहा है, ताकि आम जनता को बेहतर और किफायती स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।