मध्यप्रदेश में आदिवासियों की सालों से बहुप्रतीक्षित मांग ऐतिहासिक पेसा कानून आज से लागू होगा। ये कानून एमपी में आदिवासियों के अधिकारों को बढ़ाएगा। मध्य प्रदेश में आदिवासियों की जनसंख्या बाहुल्य में है। आदिवासी परम्परा, रीति-रिवाजों, संस्कृति का संरक्षण के लिए यह एक्ट बनाया गया है। इसे लागू करने की घोषणा काफी पहले की जा चुकी है।
देशभर के कई राज्यों में लागू PESA Act का संबंध मध्यप्रदेश से अधिक। क्योंकि मध्यप्रदेश के ही जनप्रतिनिधि दिलीप सिंह भूरिया की अध्यक्षता में बनाई गई समिति की अनुशंसा पर ये एक्ट बनाया गया था। 24 दिसंबर 1996 को पेसा कानून देश में लागू हुआ था।
पेसा एक्ट के बाद ग्राम सभाओं की ताकत बढ़ जाती है। जल, जंगल, जमीन और संसाधन पर इनका अधिकार होता है। भूमि अलगाव होने से रोक सकेंगे। नशीले पदार्थों को नियंत्रित करना भी इनका काम होगा। इलाके में विकास कार्यों के लिए ग्राम सभा की मंजूरी जरूरी है। आदिवासियों पर केस करने से पहले पुलिस को ग्राम सभा को जानकारी देनी होगी। गांवों के विवाद को ग्राम सभा के स्तर पर सुलझाया जाएगा।
इसके साथ ही ग्राम सभाओं की शक्तियों में सांस्कृतिक पहचान और परंपरा का रखरखाव, आदिवासियों को प्रभावित करने वाली योजनाओं पर नियंत्रण रखना है। साथ ही गांव के अंदर प्राकृतिक संसाधनों पर भी नियंत्रण रखना है। इसके साथ ही बाहरी और आंतरिक संघर्षों के खिलाफ अपने अधिकारों और परिवेश के सुरक्षा तंत्र को बनाए रखने में सक्षम बनाता है।
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पेसा एक्ट
आदिवासियों के लिए बने कानून की रीढ़ माने जाने वाले पेसा एक्ट के तहत आदिवासियों की पारंपरिक प्रणाली को मान्यता दी गई है। केंद्र ने पंचायत (अनुसूचित क्षेत्र के लिए विस्तार) (पेसा) एक्ट 1996 कानून लागू किया था। वर्तमान में 5वीं अनुसूची में छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, आंध्रप्रदेश, गुजरात, हिमाचल, राजस्थान, तेलंगाना और राजस्थान में लागू है। यह अब 15 नवंबर मंगलवार से मध्य प्रदेश में लागू हो रहा है।
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