चंदा कारपेंटर
- विकास से कोसों दूर 'उफरी'गांव
- ग्रामीणों ने किया चुनाव के बहिष्कार का ऐलान
- सड़क नहीं तो वोट नहीं
सतना- आजादी के 70 साल बाद भी कुछ गांव ऐसे है। जहां ग्रामीण मुलभूत सुविधाओं से दूर ही नहीं कोसों दूर है गांव में ग्रामीणों के विकास की आस पूरी नहीं हो पा रही है उन्हें योजनाओं को कोई लाभ मिलता नजर नहीं आ रहा है। लगता है गांव में सड़क न होने से सरकार की योजना और विकस ग्रामीणों तक नहीं पहुंच पा रहा है।
जी हां सतना जिले में मैहर जनपद पंचायत के उफरी गांव का यहीं हाल है। 700 आबादी वाले गांव में एक सड़क तक नहीं है। बारिश के आते ही ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है।यहां किसी के बीमार होने पर खाट के सहारे 4 किमी दूर पैदल चलकर मुख्य मार्ग तक पहुंचना पड़ता है। कीचड़ से सने रास्ते बच्चों का स्कूल जाना रोक रहे है। इस बार ग्रामीणों ने वोट नहीं डालने का फैसला लिया है।
बारिश में ग्रामीणों की बढ़ी चिंता
4 किमी लंबी सड़क पूरी तरह अपना वास्तविक रूप खो चुकी है मानसून की शुरूआत में ही पूरी सड़क किचड़ से भर गई है। किचड़ से सने रास्तों पर बाइक तो दूर पैदल चलना भी मुश्किल है। किसी के बीमार होने पर खाट के सहारे मरीज को मुख्य मार्ग तक पहुंचाना पड़ता है जो गांव से करीब 4 किलोमीटर दूर है
कीचड़ से सनी सड़क ने बंद किया बच्चों का स्कूल
ग्रामीणों को अपने साथ ही बच्चों के भविष्य की चिंता सता रही है ,बारिश के समय बच्चों को स्कूल जाने में बड़ी कठिनाई का सामना करना पड़ता है। , कीचड़ से भरे रास्तों ने बच्चों का स्कूल जाना दूभर कर दिया है। परिजन अपने बच्चों को स्कूल भेजने में कतरा रहे हैं। हर साल बारिश में यहीं हाल रहता है। बारिश में 4 महीने बच्चे घर में रहकर पढ़ाई करते हैं।
जिम्मेदारों को नहीं कोई सुध तो नहीं डलेंगे वोट
70 साल बाद भी गांव में आरसीसी रोड नहीं है। सड़क गांव वालों के लिए मुसीबत बनी हुई है। ग्रामीणों कई बार जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के दरवाजे खटखटा चुके हैं जहां से सिर्फ आश्वासन ही मिलता है। चुनाव आते ही नेता वोट मांगने तो पहुंचते हैं लेकिन उसके बाद अपने वादे पूरे करने का जिम्मा उन्होंने कभी नहीं उठाया।
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पंचायत चुनाव बहिष्कार का फैसला लिया
वहीं इस बार ग्रामीणों ने एकजुट होकर पंचायत चुनाव बहिष्कार का फैसला लिया है। काम नहीं होने पर पंचायत चुनाव में वोट नहीं डालेंगे। अब अधिकारी खबर मिलने पर गांव का जायजा लेने की बात कहते हैं।
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