मध्यप्रदेश में पिछली सरकार में नियुक्त दर्जा प्राप्त मंत्रियों पर तलवार लटक रही है। कई नेता विधानसभा चुनाव भी हार गए हैं। निगम-मंडलों में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष बनाए गए ऐसे पार्टी पदाधिकारियों की नियुक्ति को लेकर भाजपा जल्द निर्णय लेगी।
दरअसल, नई सरकार के गठन के बाद से ही निगम-मंडलों की नियुक्ति स्वत: की समाप्त हो जाती है। प्रदेश में फिर भाजपा की सरकार बनी है और निगम-मंडलों में पार्टी के पदाधिकारी ही नियुक्त है इसलिए भाजपा का प्रदेश नेतृत्व प्रदर्शन के आधार पर निर्णय करेगा कि इन्हें पद पर यथावत रखा जाए या नहीं। इस संबंध में जल्द ही प्रदेश भाजपा कार्यालय में बैठक कर निर्णय लिया जाएगा।
निगम-मंडलों में ये नेता हैं नियुक्त
प्रदीप जायसवाल: मध्यप्रदेश स्टेट माइनिंग कार्पोरेशन के अध्यक्ष
मुन्नालाल गोयल: राज्य बीज एवं फर्म विकास निगम के अध्यक्ष
राजकुमार कुशवाह: राज्य बीज एवं फर्म विकास निगम के उपाध्यक्ष
आशुतोष तिवारी: हाउसिंग बोर्ड के अध्यक्ष
शैलेंद्र बरूआ: पाठ्यपुस्तक निगम के अध्यक्ष
प्रहलाद भारती: पाठ्यपुस्तक निगम के उपाध्यक्ष
निर्मला बारेला: मप्र आदिवासी वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष
विनोद गोटिया: राज्य पर्यटन विकास निगम के अध्यक्ष
नरेंद्र सिंह तोमर: राज्य पर्यटन विकास निगम के उपाध्यक्ष
जसवंत जाटव: मप्र राज्य पशुधन एवं कुक्कुट विकास निगम के अध्यक्ष
जितेंद्र लिटोरिया: मप्र खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के अध्यक्ष
रणवीर जाटव: संत रविदास हस्तशिल्प एवं हाथकरघा विकास निगम के अध्यक्ष
रघुराज कंसाना: मप्र पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष
गिर्राज दंडोतिया: ऊर्जा विकास निगम के अध्यक्ष
इमरती देवी: लघु उद्योग निगम की अध्यक्ष
जल्दी निर्णय लिया जाएगा
इनमें से कुछ पदाधिकारी विधानसभा चुनाव में हार गए हैं। वहीं, कुछ निगम-मंडलों में मंत्रियों को अध्यक्ष का प्रभार दिया जाता है। चुनाव में कुछ मंत्री चुनाव हार गए। पार्टी सूत्रों का कहना है कि निगम, मंडल और प्राधिकरण के पदाधिकारियों के संबंध में जल्द ही निर्णय लिया जाएगा।Read More: लोकसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस की आज बैक टू बैक बैठकें, कमलनाथ रहेंगे मौजूद
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