रायपुर। छत्तीसगढ़ में पिछले 5 दशकों से नक्सलवाद की चुनौती रही है। लंबी लड़ाई और लगातार सुरक्षा अभियान के बाद राज्य अब नक्सलमुक्त होने के करीब है। लेकिन जैसे ही सफलता मिली, राजनीतिक दलों के बीच इसके श्रेय को लेकर सियासी जंग शुरू हो गई है।
अमित शाह का संसद में बयान: डबल इंजन सरकार की उपलब्धियों का क्रेडिट
लोकसभा में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खात्मे को लेकर डबल इंजन सरकार की उपलब्धियों का उल्लेख किया। उन्होंने कांग्रेस और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर तंज भी कसा। उनके मुख्य बिंदु थे:
- नक्सलवाद पर कड़ी कार्रवाई: पिछले ढाई वर्षों में सुरक्षा बलों ने नक्सली मांदों पर सफलता पूर्वक कार्रवाई की।
- लाल आतंक पर नियंत्रण: बड़े-बड़े नक्सली ढेर हुए और हजारों नक्सलियों को हथियार छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा।
- डबल इंजन सरकार की उपलब्धियां: उन्होंने कहा कि नक्सलवाद का खात्मा सिर्फ डबल इंजन सरकार की रणनीति और समन्वित कार्ययोजना के कारण संभव हुआ।
- पूर्व सरकार पर तंज: अमित शाह ने कांग्रेस और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि “पिछली सरकारें केवल आरोप लगाने तक ही सीमित रहीं।”
भूपेश बघेल की चुनौती: बहस के लिए तैयार
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अमित शाह के बयान के जवाब में खुली बहस की चुनौती दी। उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल में भी नक्सलियों के खिलाफ लड़ाई जारी रही और उन्होंने बस्तर के आदिवासियों का भरोसा जीतते हुए नक्सलियों को पीछे धकेला।
रमन सिंह का पलटवार: पिछली सरकार ने सिर्फ आरोप लगाए
पूर्व मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा कि आपकी जेब में तो झीरम घाटी नक्सल वारदात के सबूत थे, लेकिन जब हाथ डालते हैं तब सिर्फ आप अखबार की एक कतरन ही निकालते हैं। दूसरों पर कीचड़ उछालकर अपने दाग नहीं छुपाये जा सकते, एक बार आईने में देखिए कि आपने सत्ता के 5 वर्षों में सिर्फ दोषारोपण ही किया है। भूपेश बघेल के दावों का जवाब देते हुए कहा कि पिछली सरकार ने केवल आरोप लगाने का काम किया, नक्सलवाद का खात्मा डबल इंजन सरकार में ही संभव हुआ। इसी में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि आपकी पार्टी ने जांच होने कहां दी डॉक्टर साहब! पता नहीं कि क्या डर है आप लोगों के मन में. कोर्ट जा जाकर जांच रोकते रहे, जांच में सबूत दिए जाएंगे ना! जैसी हम चाहते हैं जांच करवा दीजिए सबूत दे देंगे, सोच लीजिएगा, आपको पहचाना ना पड़े।
जुबानी जंग और सोशल मीडिया वार
भूपेश बघेल की चुनौती को भाजपा सांसद संतोष पांडेय ने स्वीकार किया और उनसे नक्सलियों से संबंध को लेकर सवाल पूछे। इस जुबानी जंग में पीसीसी चीफ दीपक बैज और पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव भी शामिल हो गए। दीपक बैज ने भाजपा पर नक्सलवाद पर राजनीति करने का आरोप लगाया। टीएस सिंहदेव ने कहा कि नक्सलवाद के खात्मे के लिए सभी सरकारों ने प्रयास किए हैं।
जनता की नजरें: बस्तर और आदिवासियों की चिंता कब तक टलती रहेगी?
एक अप्रैल की सुबह नक्सलवाद के खात्मे के साथ आशा की नई किरण लेकर आई, लेकिन राजनीतिक चेहरों का ध्यान बस्तर के विकास और आदिवासियों की समस्याओं से हटकर केवल क्रेडिट पॉलिटिक्स में लग गया। अब यह देखना होगा कि सियासी जंग कितनी लंबी चलेगी और जनता इसे कैसे देखती है।