छत्तीसगढ़ के 80 हजार से अधिक प्राथमिक और मिडिल स्कूल शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पास करने के लिए अतिरिक्त समय मिल गया है। सुप्रीम कोर्ट ने 3 सितंबर 2001 से 23 अगस्त 2010 के बीच नियुक्त शिक्षकों के लिए टीईटी उत्तीर्ण करने की अंतिम तिथि 31 अगस्त 2027 से बढ़ाकर 31 अगस्त 2028 कर दी है।
हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय सीमा तक टीईटी पास करना अनिवार्य होगा। ऐसा नहीं करने पर संबंधित शिक्षकों की सेवा पर असर पड़ सकता है। प्रदेश में इस श्रेणी के अधिकांश शिक्षक 50 वर्ष से अधिक आयु के हैं, जिससे उनके लिए दोबारा प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी चुनौतीपूर्ण मानी जा रही है।
प्रदेश के 80,491 शिक्षक टीईटी के दायरे में
राज्यभर में कुल 80,491 शिक्षक इस नियम के दायरे में आते हैं। इनमें अविभाजित राजनांदगांव जिले के करीब 5 हजार शिक्षक भी शामिल हैं।
नियमित परीक्षा नहीं होने से बढ़ी चिंता
शिक्षक संगठनों का कहना है कि टीईटी नियमित अंतराल पर आयोजित नहीं होती और कई बार दो-दो साल तक परीक्षा नहीं होती। इसके अलावा प्रश्नों का स्तर कई बार लोक सेवा आयोग (PSC) जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के बराबर होने से लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों को कठिनाई का सामना करना पड़ता है। संगठनों ने मांग की है कि विभाग हर तीन से चार महीने में टीईटी आयोजित करे, ताकि सभी शिक्षक समय सीमा के भीतर परीक्षा पास कर सकें।
इन जिलों में सबसे ज्यादा और सबसे कम शिक्षक
टीईटी के दायरे में आने वाले शिक्षकों की सबसे अधिक संख्या कोंडागांव (5,334), बलौदाबाजार-भाटापारा (4,535), महासमुंद (4,486), सरगुजा (4,328), रायगढ़ (4,207), सूरजपुर (4,151), बलरामपुर (3,830), कबीरधाम (3,750), गरियाबंद (3,340), जांजगीर-चांपा (3,164), कांकेर (3,078) तथा धमतरी और सारंगढ़-बिलाईगढ़ (3,053-3,053) में है।
वहीं सबसे कम शिक्षक मुंगेली (245), रायपुर (378), मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (478), सुकमा (658) और मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी (862) में हैं।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश की प्रमुख बातें
टीईटी शिक्षक बनने और सेवा में बने रहने के लिए अनिवार्य योग्यता है।
3 सितंबर 2001 से 23 अगस्त 2010 के बीच नियुक्त शिक्षकों को 31 अगस्त 2028 तक टीईटी पास करना होगा।
जिन शिक्षकों की सेवा अवधि पांच वर्ष से अधिक शेष है, उनके लिए टीईटी अनिवार्य रहेगा।
जिनकी सेवा अवधि पांच वर्ष से कम बची है, उन्हें पदोन्नति का लाभ नहीं मिलेगा।
2001 से 2010 के बीच नियुक्त संबंधित श्रेणी के शिक्षकों पर यह नियम लागू होगा।