MP Police Promotion Update: मध्य प्रदेश पुलिस विभाग में वर्षों से लंबित पदोन्नतियों को लेकर बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश के बाद पुलिस मुख्यालय (PHQ) ने उप निरीक्षक (SI), सहायक उप निरीक्षक (ASI), प्रधान आरक्षक, आरक्षक और अन्य पात्र पुलिसकर्मियों की पदोन्नति प्रक्रिया को तेज करने के लिए दो उच्चस्तरीय समितियों का गठन किया है। पुलिस महानिदेशक (DGP) की ओर से जारी आदेश के बाद अब हजारों पुलिस अधिकारी और कर्मचारी नियमित पदोन्नति की उम्मीद लगाए बैठे हैं। माना जा रहा है कि लंबे समय से अटकी प्रमोशन प्रक्रिया को अब चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा।
क्यों लिया गया यह बड़ा फैसला?
मध्य प्रदेश पुलिस विभाग में लंबे समय से बड़ी संख्या में पदोन्नति के मामले लंबित पड़े थे। जुलाई 2026 में राज्य सरकार द्वारा नियमित पदोन्नतियों का रास्ता खुलने के बाद कई विभागों में प्रमोशन की प्रक्रिया शुरू हुई, लेकिन पुलिस विभाग में प्रक्रिया अपेक्षाकृत जटिल होने के कारण मामले लंबित रहे। अब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशों के बाद पुलिस मुख्यालय ने इस प्रक्रिया को तेज करने के लिए अलग-अलग समितियां गठित कर दी हैं।
पहली समिति क्या करेगी?
PHQ द्वारा गठित पहली समिति का मुख्य उद्देश्य लंबित पदोन्नति मामलों की जांच और समीक्षा करना है।
समिति की अध्यक्षता
पुलिस महानिरीक्षक (IG) हरिनारायण चारी मिश्र
समिति के सदस्य
डीआईजी किरण लता केरकट्टा
डीआईजी रिचा चौबे
एआईजी (प्रशासन)
अन्य वरिष्ठ अधिकारी
यह समिति-
SI
ASI
प्रधान आरक्षक
अन्य पात्र पुलिस कर्मचारियों की पदोन्नति से जुड़े मामलों का परीक्षण करेगी और आगे की कार्रवाई सुनिश्चित करेगी।
दूसरी समिति की क्या होगी जिम्मेदारी?
पुलिस मुख्यालय ने SI से इंस्पेक्टर के कार्यवाहक प्रभार से जुड़े मामलों के लिए अलग समिति बनाई है।
अध्यक्ष
एडीजी के.पी. वेंकटेश्वर राव
सदस्य
आईजी सुनील पांडे
डीआईजी डी. कल्याण चक्रवर्ती
एआईजी अमित सक्सेना
यह समिति पात्र अधिकारियों की फाइलों की जांच कर अपनी अनुशंसा पुलिस मुख्यालय को सौंपेगी।
2026 में क्यों महत्वपूर्ण हो गई है पदोन्नति प्रक्रिया?
राज्य सरकार द्वारा नियमित पदोन्नतियों का रास्ता खुलने के बाद कई विभागों में कार्यवाहक पदों पर कार्यरत अधिकारियों को नियमित प्रमोशन दिया जा चुका है। ऐसे अधिकारियों के पदनाम से केवल 'कार्यवाहक' शब्द हटाकर उन्हें नियमित पदस्थापना प्रदान की गई है। अब पुलिस विभाग में भी इसी प्रक्रिया को पूरा करने की तैयारी की जा रही है।
GOP नियम बन सकते हैं चुनौती
पुलिस विभाग में पदोन्नति प्रक्रिया GOP (Guidelines on Promotion) के तहत संचालित होती है। सूत्रों के अनुसार-
प्रत्येक अधिकारी की पात्रता अलग-अलग जांची जाएगी।
सेवा रिकॉर्ड का परीक्षण होगा।
विभागीय नियमों का पालन अनिवार्य रहेगा।
कुछ मामलों में GOP नियम प्रमोशन में बाधा भी बन सकते हैं।
इसी वजह से समितियों को हर मामले की अलग-अलग समीक्षा करनी होगी।
कितने पुलिसकर्मियों को मिलेगा फायदा?
जानकारी के अनुसार पिछले लगभग पांच वर्षों में करीब 5 हजार या उससे अधिक पुलिस अधिकारी और कर्मचारियों को कार्यवाहक प्रभार दिया गया था। यदि समितियों की प्रक्रिया समय पर पूरी होती है तो बड़ी संख्या में पात्र कर्मचारियों को नियमित पदोन्नति मिल सकती है।
PHQ के आदेश से क्यों बढ़ी उम्मीदें?
पुलिस विभाग में लंबे समय से प्रमोशन का इंतजार कर रहे कर्मचारियों के लिए यह फैसला राहतभरा माना जा रहा है। दो अलग-अलग समितियों के गठन से-
लंबित फाइलों का तेजी से निपटारा होगा।
प्रमोशन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी।
पात्र कर्मचारियों को समय पर लाभ मिलने की संभावना बढ़ेगी।
विभागीय प्रशासनिक व्यवस्था भी मजबूत होगी।
FAQs
1. MP Police Promotion Update क्या है?
पुलिस मुख्यालय ने SI से लेकर आरक्षक तक की लंबित पदोन्नतियों के लिए दो हाई लेवल कमेटियां बनाई हैं।
2. पहली समिति क्या करेगी?
यह समिति SI, ASI, प्रधान आरक्षक सहित अन्य पुलिस कर्मचारियों के लंबित प्रमोशन मामलों की समीक्षा करेगी।
3. दूसरी समिति किसलिए बनाई गई है?
SI से इंस्पेक्टर के कार्यवाहक प्रभार से जुड़े मामलों की जांच और परीक्षण के लिए।
4. कितने पुलिसकर्मियों को फायदा मिल सकता है?
करीब 5 हजार या उससे अधिक पुलिस अधिकारी और कर्मचारियों को लाभ मिलने की संभावना है।
5. क्या सभी को नियमित पदोन्नति मिलेगी?
नहीं। प्रत्येक मामले की पात्रता GOP नियमों और सेवा रिकॉर्ड के आधार पर तय की जाएगी।
निष्कर्ष
मध्य प्रदेश पुलिस विभाग में पदोन्नति प्रक्रिया को लेकर पुलिस मुख्यालय का यह कदम हजारों पुलिसकर्मियों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश के बाद गठित दोनों उच्चस्तरीय समितियां लंबित मामलों की समीक्षा कर समयबद्ध तरीके से प्रमोशन प्रक्रिया को आगे बढ़ाएंगी। हालांकि अंतिम निर्णय पात्रता, सेवा रिकॉर्ड और GOP नियमों के आधार पर ही लिया जाएगा।