रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन प्रश्नकाल के दौरान जल जीवन मिशन और अमृत मिशन के तहत पेयजल आपूर्ति का मुद्दा जोरदार तरीके से गूंजा। उपमुख्यमंत्री एवं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) मंत्री अरुण साव को सत्ता पक्ष के ही भाजपा विधायकों ने योजनाओं के क्रियान्वयन और पेयजल संकट को लेकर तीखे सवालों के घेरे में लिया।
बैकुंठपुर में जल जीवन मिशन फेल होने का आरोप
भाजपा विधायक भईया लाल राजवाड़े ने आरोप लगाया कि उनके विधानसभा क्षेत्र बैकुंठपुर (कोरिया) में जल जीवन मिशन पूरी तरह विफल साबित हुआ है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के कई गांवों में गुणवत्तापूर्ण कार्य नहीं हुआ और आज भी लोगों तक नल से पानी नहीं पहुंच रहा है। इस पर मंत्री अरुण साव ने जवाब देते हुए कहा कि कोरिया जिले में जल जीवन मिशन के कार्य अभी जारी हैं और सभी परियोजनाएं पूरी नहीं हुई हैं। यदि कहीं शिकायत है तो उसका निराकरण कराया जाएगा। हालांकि मंत्री के जवाब से असंतुष्ट भईया लाल राजवाड़े ने कहा कि उन्हें सरकार के जवाब से संतोष नहीं है।
रायपुर में जल संकट पर सरकार से सवाल
प्रश्नकाल के दौरान विधायक अजय चंद्राकर, सुनील सोनी और राजेश मूणत ने रायपुर शहर में पेयजल संकट का मुद्दा उठाया। विधायकों ने कहा कि राजधानी के लोग हर साल भीषण जल संकट झेलते हैं। कई इलाकों में पानी की टंकियां होने के बावजूद टैंकरों के जरिए पानी की आपूर्ति करनी पड़ती है। अजय चंद्राकर ने अमृत मिशन के तहत रायपुर में बनाई गई 25 योजनाओं में से केवल 20 में आंशिक जलापूर्ति होने पर सवाल उठाते हुए पूछा कि चयन का आधार क्या था और पूरी परियोजना कितनी राशि की थी।
मंत्री का जवाब
उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने बताया कि रायपुर में अमृत मिशन का क्रियान्वयन वर्ष 2016 से शुरू हुआ। उपलब्ध बजट के अनुसार केवल पांच पैकेजों को स्वीकृति मिल सकी, जिसके चलते 20 क्षेत्रों में आंशिक जलापूर्ति संभव हो पाई। उन्होंने कहा कि वर्तमान में 304 करोड़ रुपये के कार्य प्रक्रियाधीन हैं और सरकार का लक्ष्य भविष्य में सभी घरों तक नल से पानी पहुंचाना है।
1.21 लाख घरों में नहीं पहुंच रहा पानी
अजय चंद्राकर ने दावा किया कि रायपुर में 1.21 लाख घरों तक पानी नहीं पहुंच रहा है। उन्होंने पूछा कि परियोजना किस आधार पर तैयार की गई और किन वार्डों को इसमें शामिल किया गया।
इस पर मंत्री ने कहा कि पहले चरण में 10 लाख से कम आबादी वाले शहरों के लिए केंद्र सरकार के निर्धारित मानकों के अनुसार राशि स्वीकृत हुई थी। बजट की कमी के कारण कई कार्य पूरे नहीं हो सके, लेकिन सरकार शेष क्षेत्रों में भी जलापूर्ति सुनिश्चित करने के लिए काम कर रही है।
15वें वित्त आयोग की राशि पर भी सवाल
अजय चंद्राकर ने स्मार्ट सिटी और 15वें वित्त आयोग से पेयजल योजनाओं के लिए उपलब्ध कराई गई राशि का ब्यौरा भी मांगा। जवाब में मंत्री ने बताया कि 15वें वित्त आयोग से 45.33 करोड़ रुपये की राशि लाभांडी सहित विभिन्न क्षेत्रों में पेयजल अधोसंरचना के विकास के लिए स्वीकृत की गई है।
PHE की जिम्मेदारी पर तीखी बहस
प्रश्नकाल के दौरान अजय चंद्राकर ने यह भी पूछा कि लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग आखिर किस योजना के तहत पेयजल उपलब्ध कराता है और नगर निगम क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति की अंतिम जिम्मेदारी किसकी है।
मंत्री अरुण साव ने कहा कि पेयजल आपूर्ति और उसकी गुणवत्ता जांच के लिए पूरा तंत्र कार्यरत है तथा कार्यपालन अभियंता इसकी निगरानी करते हैं। उन्होंने कहा कि पहले PHE विभाग ही इन योजनाओं का संचालन करता था।
हालांकि चंद्राकर ने कहा कि उनके मूल प्रश्न का जवाब नहीं दिया गया और यदि उनका सवाल गलत है तो सदन नियमानुसार कार्रवाई कर सकता है।