मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा है कि 2028 में उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ मेले से पहले क्षिप्रा नदी को प्रदूषण मुक्त बनाना मध्य प्रदेश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उज्जैन में हर 12 साल बाद सिंहस्थ मेला लगता है। आखिरी धार्मिक मेला 2016 में आयोजित किया गया था। मेले की तैयारियों की समीक्षा के लिए मुख्यमंत्री यादव ने मंगलवार को एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। एक अधिकारी ने बुधवार को मुख्यमंत्री के हवाले से कहा, ‘‘ सिंहस्थ मेले से पहले पवित्र क्षिप्रा नदी को प्रदूषण मुक्त बनाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और धार्मिक मेले की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए पवित्र शहर के लिए योजनाएं बनाई जानी चाहिए।”
शहरी प्रशासन और विकास विभाग के प्रधान सचिव नीरज मंडलोई ने बताया कि मुख्यमंत्री ने जनता की सुविधा को ध्यान में रखते हुए नदी के संरक्षण का निर्देश दिया है और इसके मुताबिक नदी के दोनों किनारों पर घाट विकसित किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि क्षिप्रा नदी में पानी के निरंतर प्रवाह और स्वच्छता को बनाए रखने के लिए सभी विभाग और एजेंसियां तीन स्तरों पर काम करेंगी और नदी के संरक्षण के लिए "नमामि क्षिप्रा" कार्यक्रम भी शुरू किया जाएगा। मंडलोई ने कहा कि कान्ह नदी के साथ-साथ क्षिप्रा नदी में मिलने वाली अन्य नदियों और नालों का उपचार 2027 तक पूरा किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि सिंहस्थ मेले के आयोजन, उसकी निगरानी और समन्वय के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में एक मंत्रिमंडल समिति बनाने का भी निर्णय लिया गया।
उज्जैन में धार्मिक मेले के बेहतर समन्वय और प्रबंधन के लिए, अधिकारियों की एक टीम प्रयागराज और हरिद्वार का दौरा करेगी जहां कुंभ मेले आयोजित होते हैं। अधिकारी ने बताया कि सिंहस्थ मेला-2028 के मद्देनजर लोगों की सुविधा के लिए पूरे मालवा-निमाड़ क्षेत्र में विकास कार्य भी किए जायेंगे। मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिये कि महाकाल लोक के प्रथम एवं द्वितीय चरण के विकास के समन्वय से उज्जैन में विकसित की जाने वाली 'आध्यात्मिक नगरी' की योजना बनाई जाए।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा है कि 2028 में उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ मेले से पहले क्षिप्रा नदी को प्रदूषण मुक्त बनाना मध्य प्रदेश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है
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