रायपुर में कमिश्नरेट पुलिस ने सूखा नशा और सिंथेटिक ड्रग्स के एक बड़े अंतर्राज्यीय नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। जांच में सामने आया है कि इस गिरोह का संचालन दिल्ली से किया जा रहा था, जबकि रायपुर में इसकी लोकल सप्लाई चेन सक्रिय थी। पुलिस ने इस मामले में अब तक 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
डेड ड्रॉप सिस्टम से हो रही थी सप्लाई
जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी “डेड ड्रॉप सिस्टम” का इस्तेमाल कर रहे थे। इसमें ड्रग्स को सुनसान जगहों पर छिपाकर उसकी लोकेशन और वीडियो ग्राहकों को भेज दी जाती थी, जिससे सप्लायर और ग्राहक के बीच सीधा संपर्क नहीं होता था और पुलिस से बचना आसान हो जाता था।
कुरियर और Rapido राइडर्स का इस्तेमाल
ड्रग्स की डिलीवरी के लिए आरोपी कुरियर सेवाओं के साथ-साथ Rapido राइडर्स का भी इस्तेमाल कर रहे थे। पेमेंट के लिए अलग-अलग बैंक खातों का उपयोग किया जाता था, जिससे लेनदेन को ट्रेस करना मुश्किल हो जाता था।
दिल्ली से ऑपरेट हो रहा था नेटवर्क
पुलिस के मुताबिक, इस सिंडिकेट का संचालन महेश खड़का और कुसुम हिन्दुजा कर रहे थे, जो दिल्ली में बैठकर पूरे नेटवर्क को कंट्रोल कर रहे थे। दोनों आरोपी साल 2024 में भी ड्रग्स मामले में जेल जा चुके हैं। उनके निर्देश पर रायपुर निवासी कुणाल मंगतानी कुरियर के जरिए ड्रग्स मंगाता था, जबकि सौरभ यादव, शुभम राठौर और सौरभ डोंगरे शहर में इसकी डिलीवरी करते थे।
लाखों का माल जब्त
पुलिस ने कार्रवाई के दौरान भारी मात्रा में नशीले पदार्थ और सामान बरामद किया—
48.03 ग्राम एमडीएमए (कीमत करीब ₹7 लाख)
8 पार्टी पिल्स
9 मोबाइल फोन
एक बाइक
ड्रग्स सप्लाई में इस्तेमाल किए गए कुरियर बॉक्स
जांच जारी, और खुलासों की उम्मीद
पुलिस अब इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों और सप्लाई चेन की गहराई से जांच कर रही है। आशंका जताई जा रही है कि इस गिरोह के तार अन्य राज्यों से भी जुड़े हो सकते हैं। रायपुर में सामने आया यह मामला दिखाता है कि ड्रग्स तस्करी अब हाईटेक तरीकों से संचालित हो रही है। पुलिस की इस कार्रवाई को एक बड़ी सफलता माना जा रहा है, लेकिन साथ ही यह भी साफ है कि इस नेटवर्क की जड़ें और गहरी हो सकती हैं।