नई दिल्ली: कॉलेज और विश्वविद्यालयों में रैगिंग की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने उच्च शिक्षण संस्थानों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। यूजीसी ने संस्थानों से रैगिंग के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति को प्रभावी तरीके से लागू करने और वर्ष 2009 में बनाए गए एंटी-रैगिंग नियमों का कड़ाई से पालन करने को कहा है। इसके तहत संस्थानों को छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ शिकायत मिलने पर तत्काल कार्रवाई करनी होगी। यूजीसी ने रैगिंग की रोकथाम के लिए जागरूकता अभियान, निगरानी व्यवस्था और शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत करने पर भी जोर दिया है।
हर कॉलेज में बनानी होगी एंटी-रैगिंग कमेटी
यूजीसी के निर्देशों के अनुसार प्रत्येक कॉलेज और विश्वविद्यालय में एंटी-रैगिंग कमेटी का गठन जरूरी होगा। यह कमेटी कैंपस में रैगिंग की रोकथाम और उससे जुड़ी शिकायतों की निगरानी करेगी। संस्थान को यह सुनिश्चित करना होगा कि कमेटी सक्रिय रूप से काम करे और छात्रों की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाए। कमेटी छात्रों के बीच रैगिंग के खिलाफ जागरूकता फैलाने का काम भी करेगी। इसके अलावा संवेदनशील स्थानों की पहचान कर वहां निगरानी व्यवस्था मजबूत की जाएगी। किसी शिकायत को नजरअंदाज करने के बजाय उसके तथ्यों की जांच की जाएगी। दोषी पाए जाने वाले छात्रों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
24 घंटे उपलब्ध रहेगी एंटी-रैगिंग हेल्पलाइन
रैगिंग का सामना करने वाले छात्रों को तुरंत मदद मिल सके, इसके लिए संस्थानों को 24 घंटे उपलब्ध एंटी-रैगिंग हेल्पलाइन की जानकारी प्रमुख स्थानों पर प्रदर्शित करनी होगी। इसके लिए 1800-180-5522 टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर छात्रों को उपलब्ध कराया जाना है। कॉलेज परिसर, छात्रावास और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर हेल्पलाइन की जानकारी स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसका उद्देश्य यह है कि किसी भी छात्र को शिकायत दर्ज कराने के लिए परेशान न होना पड़े। छात्र जरूरत पड़ने पर सीधे सहायता ले सकेंगे। संस्थानों की जिम्मेदारी होगी कि हेल्पलाइन की जानकारी नए छात्रों और उनके अभिभावकों तक भी पहुंचाई जाए। इससे शिकायतों को समय पर दर्ज कराने और कार्रवाई शुरू करने में मदद मिलेगी।
छात्रों और अभिभावकों को लेनी होगी एंटी-रैगिंग शपथ
यूजीसी ने छात्रों के साथ-साथ अभिभावकों को भी रैगिंग के खिलाफ शपथ दिलाने पर जोर दिया है। दाखिले के दौरान छात्रों और उनके माता-पिता या अभिभावकों से एंटी-रैगिंग शपथ लेने की व्यवस्था की जाएगी। इसका उद्देश्य छात्रों को शुरुआत से ही रैगिंग के गंभीर परिणामों और नियमों के बारे में जागरूक करना है। संस्थानों को नए विद्यार्थियों को यह समझाना होगा कि रैगिंग सामान्य परिचय या मनोरंजन का हिस्सा नहीं है। किसी छात्र को मानसिक या शारीरिक रूप से परेशान करना गंभीर मामला हो सकता है। छात्रों को शिकायत के उपलब्ध माध्यमों की जानकारी भी दी जाएगी। इस पूरी प्रक्रिया का मकसद कैंपस में सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल तैयार करना है।
जागरूकता अभियान चलाना होगा
कॉलेज और विश्वविद्यालयों को रैगिंग के खिलाफ नियमित जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। नए छात्रों को प्रवेश के समय एंटी-रैगिंग नियमों और शिकायत प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी जानी होगी। संस्थान पोस्टर, परिचर्चा, कार्यशाला और अन्य माध्यमों से छात्रों को जागरूक कर सकते हैं। वरिष्ठ छात्रों को भी यह स्पष्ट करना होगा कि रैगिंग नियमों का उल्लंघन करने पर कड़ी कार्रवाई हो सकती है। जागरूकता अभियान में रैगिंग से होने वाले मानसिक और शैक्षणिक नुकसान की जानकारी भी दी जाएगी। छात्रों को यह बताया जाएगा कि परेशानी होने पर उन्हें चुप रहने की जरूरत नहीं है। शिकायत करने के लिए संस्थान और ऑनलाइन पोर्टल जैसे माध्यम उपलब्ध हैं।
हॉस्टल और संवेदनशील जगहों पर बढ़ानी होगी निगरानी
यूजीसी ने कॉलेज परिसरों के साथ-साथ छात्रावासों और अन्य संवेदनशील स्थानों पर विशेष निगरानी रखने को कहा है। रैगिंग की घटनाएं अक्सर ऐसी जगहों पर होने की आशंका रहती है जहां निगरानी कम होती है। इसलिए संस्थानों को हॉस्टल, कॉमन रूम और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करनी होगी। वार्डन और संबंधित कर्मचारियों को भी छात्रों की सुरक्षा को लेकर सतर्क रहना होगा। नए और वरिष्ठ छात्रों के बीच होने वाली गतिविधियों पर आवश्यक निगरानी रखी जाएगी। किसी संदिग्ध गतिविधि या शिकायत को हल्के में नहीं लिया जाएगा। संस्थान का उद्देश्य रैगिंग की घटना होने के बाद कार्रवाई करने के बजाय उसे पहले ही रोकना होना चाहिए।
शिकायत मिलते ही संस्थान को करनी होगी कार्रवाई
रैगिंग की शिकायत मिलने के बाद कॉलेज या विश्वविद्यालय प्रशासन को मामले पर समय पर कार्रवाई करनी होगी। शिकायत को दबाने या नजरअंदाज करने के बजाय संबंधित तथ्यों की जांच की जाएगी। जरूरत पड़ने पर शिकायतकर्ता छात्र की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कदम उठाए जा सकते हैं। जांच में रैगिंग की पुष्टि होने पर दोषी छात्रों के खिलाफ संस्थागत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। गंभीर मामलों में प्राथमिकी दर्ज कराने की प्रक्रिया भी अपनानी होगी। यूजीसी ने संस्थानों को रैगिंग के मामलों में सख्त रवैया अपनाने पर जोर दिया है। इसका उद्देश्य छात्रों में यह स्पष्ट संदेश देना है कि कैंपस में रैगिंग किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
नेशनल एंटी-रैगिंग पोर्टल पर भी कर सकते हैं शिकायत
अगर किसी छात्र को कॉलेज या विश्वविद्यालय में रैगिंग का सामना करना पड़ता है, तो वह नेशनल एंटी-रैगिंग पोर्टल के माध्यम से शिकायत दर्ज कर सकता है। छात्र ऑनलाइन माध्यम से घटना से जुड़ी जानकारी साझा कर सकते हैं। इसके अलावा शिकायत सीधे संस्थान की एंटी-रैगिंग कमेटी या एंटी-रैगिंग स्क्वाड को भी दी जा सकती है। छात्रों को अपनी शिकायत में घटना से जुड़ी जानकारी स्पष्ट रूप से देने की सलाह दी जाती है। इससे मामले की जांच में मदद मिल सकती है। संस्थान को शिकायत मिलने के बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत कार्रवाई करनी होगी। छात्र को जरूरत पड़ने पर उपलब्ध हेल्पलाइन के जरिए भी सहायता लेने का विकल्प रहेगा।
शिकायत करते समय ये जानकारी देना रहेगा उपयोगी
रैगिंग की शिकायत दर्ज करते समय छात्र को घटना से जुड़ी अधिक से अधिक स्पष्ट जानकारी उपलब्ध करानी चाहिए। शिकायत में घटना की तारीख और समय का उल्लेख किया जा सकता है। घटना कहां हुई और उसमें कौन-कौन लोग शामिल थे, इसकी जानकारी भी दी जा सकती है। छात्र के साथ वास्तव में क्या हुआ, इसे स्पष्ट रूप से बताना जांच के लिए उपयोगी रहेगा। यदि घटना से संबंधित कोई रिकॉर्ड, संदेश, फोटो, वीडियो या अन्य उपलब्ध साक्ष्य हों, तो उन्हें सुरक्षित रखना बेहतर होगा। शिकायतकर्ता को घटना से संबंधित जानकारी को यथासंभव सही और स्पष्ट तरीके से दर्ज करना चाहिए। इससे संस्थान या संबंधित अधिकारी को मामले की जांच और आगे की कार्रवाई में सहायता मिल सकती है।
रैगिंग पर अब सख्त रुख
यूजीसी के इन निर्देशों का मुख्य उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार करना है। आयोग ने संस्थानों को यह स्पष्ट संकेत दिया है कि रैगिंग के मामलों में किसी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। कॉलेजों को रोकथाम से लेकर शिकायत और कार्रवाई तक पूरी व्यवस्था को मजबूत करना होगा। छात्रों और अभिभावकों को भी नियमों के प्रति जागरूक किया जाएगा। रैगिंग की शिकायत मिलने पर संस्थान को समय पर कदम उठाना होगा। दोषी पाए जाने पर संस्थागत कार्रवाई के साथ गंभीर मामलों में कानूनी प्रक्रिया भी अपनाई जा सकती है। ऐसे में छात्रों को किसी भी तरह की रैगिंग का सामना होने पर चुप रहने के बजाय उपलब्ध शिकायत माध्यमों का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है।