मुंबई: कर्नाटक कैबिनेट की ओर से तुलु भाषा को दक्षिण कन्नड़ और उडुपी जिलों में दूसरी अतिरिक्त प्रशासनिक भाषा के रूप में मान्यता दिए जाने के फैसले के बाद अभिनेता सुनील शेट्टी ने भावुक प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए तुलु भाषा और अपनी जड़ों से जुड़े रिश्ते को साझा किया।
‘तुलु मेरे वजूद का हिस्सा है’
सुनील शेट्टी ने कहा कि यह विषय उनके दिल के बेहद करीब है। उन्होंने लिखा कि तुलु उनके लिए सिर्फ एक ऐसी भाषा नहीं है जिसे वह बोलते हैं, बल्कि यह उनके वजूद का हिस्सा है। उनके मुताबिक, तुलु भाषा में उनकी जड़ें, यादें, अपने लोग और उनका घर बसता है।

पीढ़ियों से भाषा को आगे बढ़ाने वालों को किया सलाम
अभिनेता ने इस फैसले को उन सभी तुलुवासियों के लिए गर्व का क्षण बताया, जिन्होंने पीढ़ियों से अपनी भाषा और संस्कृति को संभालकर रखा और आगे बढ़ाया। सुनील शेट्टी ने अपनी पोस्ट के अंत में ‘तुलुवेरे सोल्मेलु’ लिखकर तुलु समुदाय के लोगों को शुभकामनाएं दीं और इसके साथ नमस्कार व दिल वाले इमोजी भी साझा किए।
तुलु से सुनील शेट्टी का गहरा जुड़ाव
सुनील शेट्टी का जन्म कर्नाटक के मैंगलुरु में हुआ है और उनका पारिवारिक जुड़ाव तटीय कर्नाटक से रहा है। ऐसे में तुलु भाषा को मिले इस प्रशासनिक दर्जे पर उनकी प्रतिक्रिया उनके व्यक्तिगत और सांस्कृतिक जुड़ाव को भी सामने रखती है। उनके संदेश में भाषा के साथ-साथ अपनी जड़ों और विरासत के प्रति भावनात्मक लगाव दिखाई दिया।