भारत में बच्चों के बीच डायबिटीज के बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य मंत्रालय ने अहम कदम उठाया है। मंत्रालय ने निर्देश दिया है कि बचपन में ही डायबिटीज की स्क्रीनिंग की जाए, ताकि बीमारी का समय रहते पता लगाकर बेहतर प्रबंधन किया जा सके।
किन बच्चों की होगी स्क्रीनिंग?
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, ऐसे बच्चे जिनके परिवार में डायबिटीज का इतिहास है, मोटापे से ग्रस्त हैं या जिनकी जीवनशैली असंतुलित है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर स्क्रीनिंग में शामिल किया जाएगा। इसके अलावा, 10 साल से अधिक उम्र के बच्चों की नियमित जांच पर भी जोर दिया गया है।
शुरुआती लक्षणों पर रखें नजर
मंत्रालय ने अभिभावकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। बार-बार प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना, अचानक वजन कम होना और थकान जैसे लक्षणों को नजरअंदाज न करने की अपील की गई है।
संतुलित आहार और एक्टिव लाइफस्टाइल जरूरी
डायबिटीज से बचाव के लिए बच्चों में हेल्दी डाइट और नियमित शारीरिक गतिविधि को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है। जंक फूड से दूरी और रोजाना एक्सरसाइज को बच्चों की दिनचर्या का हिस्सा बनाने की सलाह दी गई है।
इलाज से ज्यादा जरूरी रोकथाम
विशेषज्ञों का मानना है कि बचपन में ही सही आदतें विकसित कर डायबिटीज के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। समय पर जांच और जागरूकता इस दिशा में सबसे बड़ा हथियार है।