नई दिल्ली: देश के कई हिस्सों में मौसमी इन्फ्लूएंजा यानी H1N1 (स्वाइन फ्लू) के मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 20 अगस्त तक 1,777 H1N1 मामले सामने आ चुके हैं। पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 229 था, यानी इस साल मामलों में करीब आठ गुना वृद्धि हुई है।
हालांकि बढ़ते मामलों के बीच भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने लोगों को राहत देते हुए स्पष्ट किया है कि देश में H1N1 का कोई नया स्ट्रेन सामने नहीं आया है। वैज्ञानिकों के मुताबिक अभी फैल रहा वायरस मौसमी इन्फ्लूएंजा का ही हिस्सा है और 2025 से देश में इसकी मौजूदगी दर्ज की जा रही है।
दिल्ली में एक दिन में सामने आए 114 नए H1N1 केस
दिल्ली में इस साल अब तक कुल 2,392 Influenza-A मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें H1N1 के 1,777 मामले हैं। 20 अगस्त को अकेले 114 नए H1N1 संक्रमित मिले थे। इसके अलावा H1 के 37 और H3 के 138 मामले भी सामने आए हैं।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस साल दिल्ली में H1N1 सबसे प्रमुख Influenza-A subtype बना हुआ है। कुल मौसमी इन्फ्लूएंजा मामलों में Influenza-B के 210 मामले भी दर्ज किए गए हैं।
पिछले साल के मुकाबले करीब 8 गुना बढ़े मामले
दिल्ली में H1N1 के मामलों में इस साल तेज उछाल देखने को मिला है। 2025 में इसी अवधि तक 229 मामले सामने आए थे, जबकि इस साल संख्या बढ़कर 1,777 तक पहुंच गई है।मामलों में इस तेज वृद्धि को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी बढ़ा दी है। अस्पतालों में मरीजों की संख्या और गंभीर मामलों पर लगातार नजर रखी जा रही है।
यूपी समेत कई राज्यों में बढ़ा संक्रमण
दिल्ली के अलावा उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ में भी H1N1 के मामले सामने आए हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार यूपी में 337, हरियाणा में 119 और पंजाब में 93 मामले बताए गए हैं। मुंबई में 15 अगस्त तक 309 H1N1 मरीज मिले थे, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह संख्या 72 थी।
उत्तरप्रदेश में सामने आए मामलों में NCR क्षेत्र के जिलों की हिस्सेदारी भी बताई गई है। मेरठ, गाजियाबाद और गौतमबुद्ध नगर में कुछ मरीजों का इलाज चल रहा है। वहीं उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और पंजाब में भी स्वास्थ्य विभागों ने फ्लू को लेकर सतर्कता बढ़ाई है।
ICMR ने साफ किया- नहीं आया कोई नया H1N1 स्ट्रेन
मामलों में बढ़ोतरी के बीच लोगों में नए और ज्यादा खतरनाक वायरस को लेकर चिंता बढ़ रही थी। इस पर ICMR वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि भारत में H1N1 का कोई नया स्ट्रेन नहीं मिला है।
ICMR के मुताबिक फिलहाल देश में घूम रहा Influenza A (H1N1)pdm09 वायरस 2025 से ही मौजूद है और नियमित निगरानी में है। वैज्ञानिकों ने यह भी बताया कि मौजूदा वायरस उत्तरी गोलार्ध के लिए सुझाए गए वैक्सीन स्ट्रेन से मेल खाता है।
ICMR बोला- घबराएं नहीं, लेकिन सावधानी जरूरी
ICMR के मुताबिक मौसमी इन्फ्लूएंजा, जिसमें H1N1 भी शामिल है, ज्यादातर मामलों में self-limiting होता है। सामान्य लक्षणों में बुखार, खांसी, सिरदर्द और शरीर में दर्द शामिल हो सकते हैं। अधिकतर लोग उचित देखभाल और आराम से ठीक हो जाते हैं।
हालांकि छोटे बच्चों, बुजुर्गों और पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों में गंभीर संक्रमण का जोखिम अधिक हो सकता है। ऐसे लोगों को लक्षण बढ़ने या लंबे समय तक बने रहने पर समय पर डॉक्टर से संपर्क करने की सलाह दी गई है।
जेपी नड्डा ने की H1N1 की स्थिति की समीक्षा
H1N1 मामलों में बढ़ोतरी के बीच केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने 21 अगस्त को देश में इन्फ्लूएंजा की स्थिति और स्वास्थ्य सुविधाओं की तैयारियों की समीक्षा की।
बैठक में राष्ट्रीय निगरानी व्यवस्था, Influenza-like Illness (ILI), Severe Acute Respiratory Infection (SARI), टेस्टिंग, लैब निगरानी और अस्पतालों की तैयारियों की समीक्षा की गई। स्वास्थ्य मंत्री ने राज्यों को लगातार निगरानी रखने और मामलों में किसी भी असामान्य बढ़ोतरी की समय पर पहचान करने पर जोर दिया।
अस्पतालों को अलर्ट मोड पर रखने के निर्देश
केंद्र और राज्य स्तर पर स्वास्थ्य विभाग अस्पतालों की तैयारियों पर नजर रख रहे हैं। दिल्ली स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक राजधानी में फिलहाल बेड, डॉक्टर, दवाओं और जरूरी मेडिकल उपकरणों की कमी नहीं है। मरीजों की संख्या के अनुसार अस्पतालों की व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग Integrated Disease Surveillance Programme के जरिए Influenza-like Illness और Severe Acute Respiratory Infection समेत फ्लू के मामलों की निगरानी कर रहा है।
विशेषज्ञों की सलाह- भीड़ में सावधानी बरतें
विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ते मामलों को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सावधानी जरूर बरतनी चाहिए। खासकर अधिक जोखिम वाले लोगों को भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचना चाहिए।खांसी या जुकाम होने पर दूसरों से दूरी बनाए रखना, खांसते या छींकते समय मुंह ढकना और हाथों की स्वच्छता का ध्यान रखना संक्रमण के प्रसार को कम करने में मदद कर सकता है।
यदि बुखार, खांसी या अन्य लक्षण लगातार बने रहें अथवा स्थिति बिगड़ती दिखाई दे तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। गंभीर लक्षणों को नजरअंदाज करने के बजाय समय पर जांच और उपचार कराना ज्यादा सुरक्षित है।