दुबई से तेल अवीव आ रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 में कॉकपिट के भीतर ओमानी को-पायलट के भारतीय कैप्टन पर किए गए जानलेवा हमले और विमान क्रैश करने की साजिश के बाद अब इजरायल की खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है। इजरायली न्यूज चैनल चैनल 12 की एक सनसनीखेज रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि इजरायल की आंतरिक सुरक्षा एजेंसी शिन बेट और परिवहन मंत्रालय की घोर लापरवाही की वजह से ही यह बड़ा सुरक्षा तंत्र ध्वस्त हुआ। अब्राहम समझौते के स्पष्ट नियमों के बावजूद इजरायल ने ओमान जैसे गैर-कूटनीतिक संबंधों वाले देशों के पायलटों को अपने एयर स्पेस में उड़ने की बिना किसी जांच-पड़ताल के छूट दे रखी थी। इस लापरवाही ने गंभीर सुरक्षा खामी को उजागर कर दिया है।
अब्राहम समझौते के नियमों का उल्लंघन
रिपोर्ट के मुताबिक 2020 में यूएई और इजरायल के बीच हुए अब्राहम समझौते में यह साफ प्रावधान था कि जिन देशों के इजरायल के साथ कूटनीतिक संबंध नहीं हैं उन देशों के नागरिक या पायलट इजरायल जाने वाली उड़ानों के कॉकपिट में नहीं हो सकते। ओमान के साथ इजरायल के कोई औपचारिक संबंध नहीं हैं। इसके बावजूद इजरायली सुरक्षा एजेंसियों की ढिलाई का आलम यह था कि उन्होंने कभी कोई जांच नहीं की बल्कि एयरलाइन के भरोसे ही अपना काम छोड़ा हुआ था। समझौते के नियमों की अनदेखी ने सुरक्षा व्यवस्था को कमजोर बना दिया। ओमानी पायलटों को बिना उचित स्क्रीनिंग के उड़ान की अनुमति मिलती रही।
शिन बेट की जांच में बड़ी खामी
शिन बेट ने फ्लाईदुबई के पायलटों के बैकग्राउंड की कभी गहन जांच ही नहीं की। उन्होंने केवल एयरलाइन से जबानी तौर पर कह दिया था कि वे गैर-मित्र देशों के पायलटों को इजरायल न भेजें। कोई लिखित प्रोटोकॉल या नियमित वेरिफिकेशन सिस्टम लागू नहीं किया गया। सुरक्षा एजेंसियों ने एयरलाइन पर पूरा भरोसा कर लिया और अपनी जिम्मेदारी से पीछे हट गए। इस ढिलाई के कारण दर्जनों ओमानी पायलट इजरायल जाने वाली उड़ानों में कॉकपिट तक पहुंच गए। चैनल 12 की रिपोर्ट ने इस प्रणालीगत विफलता को उजागर किया है। अब एजेंसियों पर जवाबदेही तय करने की मांग उठने लगी है।
एयरलाइन के भरोसे छोड़ी गई सुरक्षा
खुफिया एजेंसियों ने एयरलाइन के भरोसे सुरक्षा व्यवस्था छोड़ दी थी। फ्लाईदुबई जैसी कंपनियों को केवल मौखिक निर्देश दिए गए कि गैर-मित्र देशों के पायलटों को इजरायल न भेजें। कोई नियमित ऑडिट या बैकग्राउंड चेक की व्यवस्था नहीं की गई। परिणामस्वरूप ओमान जैसे देश के पायलट बिना किसी बाधा के उड़ानें संचालित करते रहे। इस लापरवाही ने कॉकपिट सुरक्षा को कमजोर बना दिया। हमले की घटना ने साबित कर दिया कि मौखिक निर्देश पर्याप्त नहीं थे। अब परिवहन मंत्रालय और शिन बेट दोनों पर सवाल खड़े हो गए हैं।
आगे की जांच और जवाबदेही की मांग
इस खुलासे के बाद इजरायली सुरक्षा प्रतिष्ठान में हलचल मच गई है। शिन बेट और परिवहन मंत्रालय की लापरवाही पर गहन जांच की मांग की जा रही है। अब्राहम समझौते के प्रावधानों का उल्लंघन कैसे हुआ और दर्जनों ओमानी पायलट कैसे सिस्टम में घुस गए इसकी पूरी पड़ताल होनी चाहिए। फ्लाईदुबई हमले ने हवाई सुरक्षा की कमियों को उजागर कर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त प्रोटोकॉल लागू करने होंगे। इजरायली एजेंसियों पर अब जवाबदेही तय करने का दबाव बढ़ गया है।