ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका और डेनमार्क के बीच तनाव एक बार फिर सुर्खियों में है। रणनीतिक रूप से बेहद अहम माने जाने वाले इस आर्कटिक द्वीप पर नियंत्रण को लेकर वैश्विक महाशक्तियों की नजरें टिकी हुई हैं। इसी पृष्ठभूमि में डेनमार्क ने ग्रीनलैंड में अपनी सैन्य गतिविधियों को तेज कर दिया है।
F-35 फाइटर जेट्स की संयुक्त प्रशिक्षण उड़ान
शुक्रवार को डेनमार्क के दो अत्याधुनिक F-35 फाइटर जेट्स ने फ्रांस के मल्टीरोल टैंकर ट्रांसपोर्ट (MRTT) एयरक्राफ्ट के साथ दक्षिण-पूर्वी ग्रीनलैंड के ऊपर संयुक्त प्रशिक्षण उड़ान भरी। डेनिश सेना के अनुसार, यह अभ्यास आर्कटिक जैसी कठिन परिस्थितियों में सैन्य तैयारियों को परखने के लिए किया गया।
आर्कटिक परिस्थितियों में युद्ध अभ्यास
डेनमार्क की सेना ने बताया कि इस मिशन का उद्देश्य हवाई रिफ्यूलिंग, लंबी दूरी की उड़ानें और सुरक्षा से जुड़े संयुक्त अभियानों का अभ्यास करना था। यह उड़ान डेनमार्क के फाइटर विंग स्काइडस्ट्रप से शुरू होकर ग्रीनलैंड के पूर्वी तट पर स्थित कुलसुक क्षेत्र तक गई। इस दौरान विमान उत्तरी अटलांटिक में फरो आइलैंड्स के ऊपर से भी गुजरे।
ट्रंप की मांग और अमेरिका का रुख
यह सैन्य गतिविधि ऐसे समय पर हुई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण की मांग कर रहे हैं। ट्रंप प्रशासन ग्रीनलैंड को अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा और प्रस्तावित ‘गोल्डन डोम’ डिफेंस सिस्टम के लिए बेहद अहम बता रहा है। व्हाइट हाउस की ओर से सैन्य विकल्प से इनकार न करने के संकेत भी दिए गए हैं।
NATO की स्थायी मौजूदगी की तैयारी
ट्रंप की चेतावनी के जवाब में डेनमार्क ने स्पष्ट किया है कि वह ग्रीनलैंड की सुरक्षा को लेकर कोई समझौता नहीं करेगा। डेनमार्क सरकार वहां NATO की बड़ी और अधिक स्थायी मौजूदगी स्थापित करने की योजना पर आगे बढ़ रही है। इससे साफ संकेत मिलता है कि ग्रीनलैंड आने वाले समय में वैश्विक शक्ति संघर्ष का बड़ा केंद्र बन सकता है।
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